=राजधानी में इस साल कांवड़ यात्रा न केवल भक्ति और तपस्या का प्रतीक बनी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और नशा मुक्ति का संदेश फैलाने का भी एक अनूठा मंच बन गई है। कांवड़िये सड़कों पर नारे, पोस्टर और जागरूकता अभियानों के माध्यम से समाज को पर्यावरण और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान कांवड़िये पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई पहल कर रहे हैं। गंगाजल भरने वाली प्लास्टिक की मटकी की जगह डोलची और जूट के विकल्प का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह पहल सिंगल-यूज प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए किया जा रहा है। कई कांवड़ शिविरों में स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं, जहां कांवड़िये और स्वयंसेवी संगठन सड़कों, घाटों और जलाशयों की सफाई में जुटे हैं।
कुछ शिविरों में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां शिवभक्तों ने पेड़ लगाकर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। कुछ लोकप्रिय स्लोगन नशा नाश की जड़ है, इससे दूर रहो मेरे भाई और नशा अपनाओगे तो खुशियों से दूर हो जाओगे जैसे स्लोगनों को लेकर यात्रा कर रहे हैं।
कांवड़िये राहुल शर्मा ने बताया कि उनकी यात्रा केवल भगवान शिव की भक्ति तक सीमित नहीं है। वह समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि स्वच्छ पर्यावरण और नशा मुक्त जीवन ही सच्ची भक्ति और प्रगति का आधार है। इस पहल ने न केवल कांवड़ियों बल्कि लोगों के बीच भी सकारात्मक प्रभाव डाला है।