आयाराम-गयाराम की सियासत के इस दौर में सबकी नजरें एनआईटी से निर्दलीय
विधायक व प्रदेश के श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शिवचरण लाल शर्मा पर टिकी
हैं।
उन्होंने अपने क्षेत्र निवासी पार्षद जगन डागर की कांग्रेस में भर्ती
के बहाने मुख्यमंत्री से नाराजगी जताई है। क्योंकि डागर एनआईटी से चुनाव
लड़ने वालों की लाइन में हैं।
इस समय प्रदेश के कई कद्दावर नेता
मुख्यमंत्री से नाराजगी जताकर दूसरी पार्टियों में जा चुके हैं। ऐसे में
शर्मा की नाराजगी के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
शर्मा ने ‘अमर
उजाला’ से बातचीत में सवाल किया कि क्या डागर के कांग्रेस में शामिल होने
की जानकारी मुख्यमंत्री को नहीं होगी। सांसद दीपेंद्र हुड्डा डागर के घर
आकर चले गए और उनसे इस बारे में पूछा तक नहीं गया।
'मुझसे बिना पूछे क्यों लिया मेरे इलाके का व्यक्ति'
इस बावत वह सोमवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री से
मिलकर नाराजगी जताएंगे। शर्मा ने कहा कि उनका इरादा तो कांग्रेस से चुनाव
लड़ने का था। लेकिन पता नहीं था कि मुख्यमंत्री एक ऐसे व्यक्ति को पार्टी
में शामिल करवा लेंगे जो कभी बसपा और आम आदमी पार्टी में रहा है।
यह मंत्री
का अपमान नहीं तो और क्या है। जब मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को
मेरी जरूरत थी मैंने उन्हें सहयोग दिया और अब पृथला के विधायक रघुवीर सिंह
तेवतिया के कहने पर मेरे इलाके के व्यक्ति को बिना मुझसे पूछे पार्टी में
ले लिया।
डागर का आना है नाराजगी का कारण
शर्मा कहना है कि उन्हें तो कोई कह रहा है बीजेपी से लड़ लो, कोई कांग्रेस
और कोई दूसरी पार्टियों से, पर उनके पास तो आखिरी हथियार आजाद लड़ाई का है।
उधर, सूत्रों का कहना है कि जगन डागर को एनआईटी विधानसभा से कांग्रेस की
टिकट मिल सकती है। क्योंकि कांग्रेस के पास इस सीट पर कोई मजबूत प्रत्याशी
नहीं है। यहां 2009 में शिवचरण लाल शर्मा से हार चुके पूर्व मंत्री एसी
चौधरी अब इधर देखना भी नहीं चाहते हैं।
बताया जाता है कि डागर विधानसभा
चुनाव लड़ने की लालच में बसपा छोड़कर आम आदमी पार्टी में गए थे। लेकिन
पार्टी ने यहां पर चुनाव न लड़ने का फैसला किया इसलिए उनके अरमानों पर पानी
फिर गया और फिर उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसी वजह से शिवचरण
लाल शर्मा उनसे जले भुने बैठे हैं।
शर्मा नहीं हैं कांग्रेस के सदस्य
शर्मा 2009 के चुनाव से पहले
कांग्रेसी थे। वह जिला इकाई में उपाध्यक्ष एवं नगर निगम में सीनियर डिप्टी
मेयर थे। एनआईटी से टिकट का दावा किया लेकिन पार्टी ने पूर्व मंत्री एसी
चौधरी को टिकट दे दिया।
इस पर शर्मा ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर निर्दलीय
चुनाव लड़ा और चौधरी को उनसे मात खानी पड़ी। लेकिन निर्दलीय विधायक बने
शर्मा की जरूरत सियासी गणित में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को पड़
गई।
इस तरह शर्मा को मंत्री पद की लाटरी लगी। पिछले दिनों जब कांग्रेस के
पर्यवेक्षक यहां आए तो शर्मा ने उनसे मुलाकात की थी, लेकिन बाद में यह कहा
था कि वह टिकट की दावेदारी के लिए नहीं गए थे।