रोहित मनचंदा (बाएं) और पुष्पेंद्र श्रीवास्तव (दाएं)
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दिल्ली कांग्रेस में शह और मात की सियासत चरम पर है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी जहां प्रदेश नेतृत्व के हर फैसले को पलटने की राजनीति कर रहे हैं। वहीं, प्रदेश नेतृत्व की तरफ से लगातार नए-नए निर्णय लिए जा रहे हैं। दो दिग्गजों की इस लड़ाई में कार्यकर्ता असमंजस की स्थिति में है।
प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित ने बृहस्पतिवार को एक और फैसला लेते हुए प्रवक्ताओं की टीम का गठन किया है। दीक्षित ने प्रदेश कांग्रेस के अधिकारिक पत्र पर तत्काल प्रभाव से रोहित मनचंदा, पुष्पेंद्र श्रीवास्तव और प्रोफेसर रतन जैन की नियुक्ति प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता के पद पर की है। आदेश के बाद तीनों प्रवक्ताओं ने पदभार संभाल लिया है। हालांकि इस निर्णय पर शीला दीक्षित के विरोधियों के आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आए हैं।
गौरतलब है कि बुधवार को जब प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको ने पत्र लिखकर तीनों कार्यकारी अध्यक्षों को स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति दी तो शीला दीक्षित ने इस फैसले के विपरीत तीनों कार्यकारी अध्यक्षों की जिम्मेदारी तय कर दी। शह और मात की राजनीति में आम कार्यकर्ता आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं। कार्यकर्ता यह नहीं समझ पा रहे हैं कि वे अपने प्रभारी की बात सुने या अध्यक्ष की। इस ऊहापोह की स्थित में विधानसभा चुनाव की तैयारी भी अधूरी है। टिकट के दावेदार इस राजनीति से अपने को अलग रख रहे है। दूसरी तरफ शीला विरोधी कैंप यह मान कर चल रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर जब तक अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक यही स्थिति बनी रहेगी।