पति से मधुर संबंध न होने के कारण महिला का मकान मालिक डोरजी से प्यार हो गया। दोनों के बीच शरीरिक संबंध भी बन गए। एक दिन उनके बीच झगड़ा हो गया तो महिल ने उस पर रेप का फर्जी आरोप लगाकर जेल भिजवा दिया।
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान उसकी असलियत खुल गई। अदालत ने मामले को झूठा मानते हुए आरोपी को रेप के आरोप से बरी कर दिया।
तीस हजारी अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने अपने फैसले में कहाकि पीड़ित महिला इस मामले में मुख्य गवाह है। महिला ने माना कि उसके अपने पति से सौहार्दपूर्ण संबंध नहीं थे और अक्सर झगड़ा होता रहता था।
और हो गया प्यार...
अदालत ने कहा कि जिरह के दौरान महिला ने माना इसी कारण उसका आरोपी से प्यार हो गया व दोनों के बीच घटना के दिन यानि एक नवंबर 2014 से पूर्व ही शरीरिक संबंध बन गए थे।
अदालत ने कहा कि महिला ने माना कि 1 नवंबर 2014 को आरोपी ने उसे रात को फोन कर खाने पर बुलाया व दोनों मजनू का टिल्ला सि्रात एक होटल में गए व शराब पी।
रात को किसी बात पर झगड़ा होने पर उसने पुलिस को बुला कर रेप का मामला दर्ज करवा दिया।
चोट के निशान पति से झगड़े के थे ना कि...
अदालत ने कहा कि महिला अपने बयानों से मुकर गई लेकिन फोरेंसिक रिपोर्ट के साक्ष्यों के आधार पर मुकदमा चलाया जा सकता था, लेकिन महिला ने कहा कि उसके शरीर पर जो चोट के निशान है वह आरोपी द्वारा मारपीट से नहीं बल्कि कुछ दिन पहले उसके पति से हुए झगड़े के कारण आए थे।
इसके अलावा महिला ने कहा कि पुलिस ने उससे सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवा कर शिकायत लिखी व उसे पए़ने के लिए भी नहीं दी। अदालत ने कहा कि महिला के बयान के आधार पर आरोपी को सजा प्रदान करने के कोई साक्ष्य नहीं है ऐसे में वे उसे रेप के इस आरोप से बरी करते है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार महिला ने आरोप लगाया था कि हिमाचल प्रदेश निवासी आरोपी डोरजी ने उसे शराब पिला कर उसकी सहमति के बिना जबरन रेप किया व मारपीट की।