शारदा विश्वविद्यालय ने पाकिस्तान का समर्थन करने के कारण तुर्किए के इस्तांबुल आयडिन और हसन कलोंची विश्वविद्यालयों के साथ 2017 व 2019 के रिसर्च व सांस्कृतिक आदान-प्रदान के समझौते तत्काल समाप्त कर दिए। इसकी जानकारी दोनों विश्वविद्यालयों को पत्र द्वारा दी गई है।
पाकिस्तान का साथ देने पर भारत में तुर्किए व अजरबैजान देश का बहिष्कार जारी है। इसी के तहत ग्रेटर नोएडा के शारदा विश्वविद्यालय ने भी अहम कदम उठाकर वहां के दो विश्वविद्यालय के साथ छह से आठ साल पुराना रिचर्स व कल्चर एक्सचेंज के समझौतों खत्म कर दिया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय की तरफ से तुर्किए के दोनों विश्वविद्यालय को पत्र भेज दिया है।
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शारदा विश्वविद्यालय के डायरेक्टर जनसंपर्क अजीत कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय के लिए अपना राष्ट्र सबसे पहले है। पहलगाम की घटना ने काफी आहत किया है। पाकिस्तान के साथ युद्ध की स्थिति में तुर्किए व अजरबैजान का रुख देखने को मिला, जिससे पूरे भारत के साथ वो भी खिलाफ है। इसी के तहत अब विश्वविद्यालय ने तुर्किए के दो विश्वविद्यालय के साथ अपना समझौता तत्काल समाप्त कर दिया है।
उन्होंने बताया कि इस्तांबुल आयडिन यूनिवर्सिटी व हसन कलोंची यूनिवर्सिटी के साथ विश्वविद्यालय ने रिसर्च एवं कल्चर एक्सचेंज का करार दिया था, जो वर्ष 2017 व 2019 में किए गए थे। दोनों विश्वविद्यालय के साथ रिचर्स करने और एक-दूसरे देश की सभ्यता व सांस्कृतिक से रुबरू हो रहे थे। इस साल तुर्किए के बच्चे अगस्त में भारत आते, लेकिन समझौता खत्म होने से अब ऐसा नहीं होगा। उन्होंने बताया कि समझौता खत्म करने की जानकारी पत्र के माध्यम से दोनों विश्वविद्यालय को भेज दी गई है।