स्कूल में हमेशा हंसता-खिलखिलाता और सबको हंसाने वाला स्वर्णिम उर्फ शानू आत्महत्या कर सकता है, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। क्लास में सभी को हंसाने वाले शानू का मन इस कदर आहत है यह किसी ने सोचा भी नहीं था।
मानो उसने अपने दुख छिपाने के लिए हंसी-ठिठोली की चादर लपटे रखी थी। स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित नाटक में शानू पर्यावरण बचाने का संदेश देने के लिए चीता बना था।
शानू की मौत से उनकी क्लास टीचर और सहपाठी दुखी हैं। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा कि शानू अब उनके बीच नहीं है। वैशाली सेक्टर-9 निवासी नवीं के छात्र शानू ने सोमवार रात को शाहदरा स्थित अपनी मौसी के घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
वह अपने मम्मी-पापा के अलग रहने से बेहद दुखी था। शानू की क्लास टीचर ममता ने बताया कि 19 अगस्त से शानू छुट्टी पर था। शानू का बड़ा भाई शिखर भी 31 अगस्त से छुट्टी पर है।