पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एसओजी टीम में प्रभारी संजीव कुमार समेत 16 पुलिस कर्मी शामिल थे। आलाधिकारियों ने विशेष ऑपरेशन चलाकर संगीन वारदात का खुलासा करने की जिम्मेदारी टीम को सौंपी थी।
आरोप है कि पुलिसकर्मी जिले में चल रहे गोरखधंधों की तलाश कर उनसे वसूली में मशगूल हो गए। जिले के विभिन्न स्थानों से वसूली कर टीम कुछ अधिकारियों को भी रुपये देती थी या फिर उनके नाम से अपनी जेब गर्म करती थी। वसूली के लिए एक पुलिसकर्मी को ठेकेदार बनाया गया था।
कुछ दिन पहले पुराने सिपाही से जिम्मेदारी लेकर दूसरे सिपाही को वसूली के हिसाब किताब रखने का ठेकेदार बना दिया गया। इसके बाद दोनों सिपाहियों में वसूली की रकम को लेकर विवाद हो गया।
एक सिपाही ने वसूली के रुपये और खर्च किए गए रुपयों की लिस्ट भी दूसरे को व्हाट्सऐप से भेज दी। इस लिस्ट को देखकर दूसरा पुलिसकर्मी संतुष्ट होने की बजाय और भड़क गया।
दोनों में जमकर मारपीट हुई। इससे आक्रोशित एक पुलिसकर्मी ने बृहस्पतिवार देर रात भेजी गई लिस्ट का स्क्रीन शॉट लेकर डीजीपी को ट्वीट कर दिया। इसके बाद महकमे में हड़कंप मच गया और टीम के सभी 16 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया। मालूूम हो कि एसओजी का नाम बदलकर अब क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन विंग कर दिया गया है।
इन पर गिरी गाज
हेडकांस्टेबल मदन सिंह, सचिन कुमार, मो. अब्दुल, धूम सिंह, कांस्टेबल सत्यवीर सिंह, नरेंद्र सिंह, जाहिर हुसैन, अमरीश कुमार, संजीव कुमार, अंकित कुमार, नीशू तेवतिया, रोहित तेवतिया, सुमित कुमार, संजीव कुमार, यशवीर ढाका, चालक नवल किशोर को एसएसपी ने मामले में लाइन हाजिर किया है।
एसपी देहात से हमराह तक के लिखे नाम
लस्ट में एसपी देहात से लेकर हमराह तक के नाम हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रकरण के सामने आने के बाद एसपी ने स्वयं आलाधिकारियों को लिखकर दिया है कि उनका नाम इस प्रकरण में कैसे आया है। इसकी गंभीरता से जांच कराई जाए। इसके अलावा सूची में वह स्थान लिखे गए हैं, जहां से रकम वसूली जाती है। खर्च के नाम पर होली व भंडारे का भी जिक्र किया गया है।