जानकारी के मुताबिक, शाहरुख सैफी दिल्ली के शाहीन बाग में एफ ब्लॉक आठ नंबर में रहता है। दरअसल, कोझिकोड में ट्रेन में सीट पर बैठने को लेकर यात्रियों में विवाद हो गया था। जिसके बाद एक आरोपी ने यात्रियों पर केमिकल फेंक दिया था, जिससे एक बोगी में आग लगने पर एक मासूम बच्ची समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस को घटनास्थल के पास एक बैग मिला था, जिसमें मिले मोबाइल से शाहरुख नामक युवक के बारे में जानकारी हुई तो केरल एसटीएफ ने यूपी एटीएस से संपर्क किया था।
इसके बाद सोमवार शाम को बुलंदशहर कस्बा निवासी शाहरुख सैफी के घर पर एटीएस की छह सदस्यीय टीम डिलीवरी देने के बहाने पहुंची थी। जब शाहरुख को फोन किया तो वह घर नहीं था और उसने डिलीवरी रद्द करने की बात कही थी। इसके बाद टीम ने शाहरुख से कहा कि ऑर्डर रद्द करने के लिए उसके हस्ताक्षर की आवश्यकता है। जिसके चलते शाहरुख घर पहुंचा और छह सदस्यीय टीम ने उसे हिरासत में ले लिया।
शाहरुख के परिजनों को एटीएस अधिकारियों ने बताया था कि वह मेरठ एटीएस टीम से हैं और केरल में हुए केमिकल हमले के मामले में उससे पूछताछ करनी है। इसके बाद एटीएस की टीम शाहरुख को साथ लेकर चली गई थी। मंगलवार दोपहर करीब दो बजे पूछताछ के बाद एटीएस की टीम ने शाहरुख को क्लीन चिट देते हुए उसे परिजनों के हवाले कर दिया। शाहरुख के वापस लौटने पर उसके पिता यामीन सैफी ने बताया शाहरुख कस्बे में ही कारपेंटर का काम करता है और वह कभी केरल नहीं गया है। पूछताछ के बाद एटीएस की टीम ने उसे छोड़ दिया।
परिजन बोले, एक दिन में केरल से लौटना संभव नहीं
शाहरुख के पिता यामीन सैफी ने बताया कि शाहरुख कभी केरल नहीं गया और यदि गया भी होता तो एक दिन में लौटना संभव नहीं था। केरल से ट्रेन से लौटने में करीब दो दिन का समय लगता है। केरल के कोझिकोड में हुआ केमिकल अटैक रविवार रात का है और सोमवार देर शाम एटीएस की टीम ने शाहरुख को हिरासत में ले लिया था।