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राजनीति: शाहरुख व सैफ के पिता और क्रिकेटर चेतन नहीं कर पाए कमाल, किंग खान के वालिद को नहीं मिला था एक भी वोट

Sun, 14 Apr 2024 07:17 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, गुरुग्राम/फरीदाबाद/चंडीगढ़

सार

हरियाणा की धरती ने तीन-तीन ऐसे सितारों को हारते देखा है, जिन्हें केवल एक राज्य नहीं बल्कि देशभर से लोग प्यार व सम्मान देते थे।
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मीर ताज मोहम्मद खान, नवाब पटौदी और क्रिकेटर चेतना शर्मा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कहते हैं राजनीति किसी खास को ही रास आती है। यह जरूरी नहीं कि जिसे लोग प्यार दें, उसे राजनेता के रूप में भी देखना चाहें। हरियाणा की धरती ने तीन-तीन ऐसे सितारों को हारते देखा है, जिन्हें केवल एक राज्य नहीं बल्कि देशभर से लोग प्यार व सम्मान देते थे। इनमें अभिनेता सैफ अली खान के पिता क्रिकेटर मंसूर अली खान (नवाब पटौदी), पूर्व क्रिकेटर चेतन शर्मा व शाहरुख खान के पिता ताज मोहम्मद शामिल हैं। 

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हरियाणा राज्य बनने के बाद 1971 में गुरुग्राम में हुए लोकसभा चुनाव में नवाब पटौदी को उतारा गया था। उनके प्रचार के लिए अभिनेत्री शर्मिला टैगोर तक आईं और हजारों की भीड़ जुटी। कपिल देव जैसे नामचीन क्रिकेटरों ने भी टाइगर पटौदी का चुनाव प्रचार किया था, लेकिन यह चुनाव मंसूर अली जीत नहीं पाए। इस चुनाव में उनको कांग्रेस प्रत्याशी और मेवात के दिग्गज नेता तैय्यब हुसैन ने मात दी थी।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेंद और बल्ले से कमाल दिलाने वाले पूर्व क्रिकेटर चेतन शर्मा भी साल 2009 के लोकसभा चुनाव में फरीदाबाद से राजनीति में हाथ आजमा चुके हैं। वे बहुजन समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े लेकिन जीत नहीं पाए। प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना व भाजपा के रामचंद बैंदा के बाद वे एक लाख वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे हैं। बसपा को उस समय चुनाव में एक मजबूत चेहरे की तलाश थी। ब्राह्मण समुदाय, बसपा का कैडर वोटर और क्रिकेटर होने के चलते बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले के तहत चेतन शर्मा को टिकट देकर मैदान में उतारा था। 
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इनसे पहले 1957 के लोकसभा चुनाव में शाहरुख खान के पिता मीर ताज मोहम्मद खान ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर किस्मत आजमाई थी। वे देश के पहले शिक्षा मंत्री और कांग्रेस उम्मीदवार अबुल कलाम आजाद के सामने उतरे थे, लेकिन उनको एक भी वोट नहीं मिला। आजादी के बाद दूसरी बार हुए चुनाव में उस समय गुड़गांव सीट पर तीन ही उम्मीदवार मैदान में थे। मौलाना अबुल कलाम को 1 लाख 91 हजार 221 वोट (66.7%) मिले थे, जबकि मूल चंद ने 95 हजार 553 मत (33.3%) हासिल किए थे। शाहरुख खान के पिता मीर ताज मोहम्मद खान स्वतंत्रता सेनानी थे उन्हें कोई वोट नहीं मिला। 
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