एक तरफ शाहीन बाग में नागरिकता कानून के खिलाफ फिर से आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है दूसरी तरफ इस आंदोलन को शुरू करने वाले कुछ नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं। जाहिर है कि अब उनके सुर बदल चुके हैं। अब उन्हें शाहीन बाग से लेकर मौजूदा किसान आंदोलन भी बेमानी लग रहा है। उनका मानना है कि किसानों को अपना आंदोलन वापस ले लेना चाहिए और शाहीन बाग में भी अब पहले की तरह समर्थन नहीं मिलेगा।
शाहीन बाग के आंदोलन के आयोजक रहे शहजाद अली ऐसे ही नेताओं में हैं। अमर उजाला से बातचीत में शहजाद कहते हैं कि किसान आंदोलन पूरी तरह शाहीन बाग की तर्ज पर चलाया जा रहा है। इसमें सड़कों को जाम कर परेशानी खड़ी करना और सरकार से बातचीत की बजाय हठधर्मी रवैया अपनाना शामिल है।
इस मामले में भी उसी तरह राजनीतिक दल अपने लिए अवसर तलाश रहे हैं जिस प्रकार वे शाहीन बाग मामले में सक्रिय हो गए थे। उन्होंने कहा कि किसानों को सरकार से बातचीत कर समस्या का समाधान तलाशना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने किसानों की ज्यादातर मांगे मान ली हैं तो उन्हें भी हठधर्मी रवैया अपनाने की बजाय आंदोलन खत्म करना चाहिए। अगर कोई मुद्दा बाकी है तो उसके लिए बातचीत जारी रखी जानी चाहिए।
इसी साल 16 अगस्त को भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके शहजाद अली ने अमर उजाला से कहा कि उन्होंने इस आंदोलन के आयोजक रहने के दौरान पाया था कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे दलों ने इस मामले में खूब राजनीति की थी। यही कारण था कि यह आंदोलन इतना लंबा चला और इसके बाद भी इस मामले का कोई समाधान नहीं निकल पाया।
अगर सरकार से टेबल पर बैठकर बातचीत की गई होती तो मामले का जल्द हल निकल सकता था। आंदोलन के अनुभव से वे कह सकते हैं कि इस तरह के मामलों का हल सरकार से बातचीत करके ही निकाला जाना चाहिए। सड़कें जाम करके लोगों के लिए परेशानियां पैदा करना किसी समस्या का हल नहीं हो सकता।
आंदोलन के एक साल हो जाने के मौके पर शहजाद अली ने कहा कि आंदोलन के कारण लोगों का भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। वे स्वयं एक व्यापारी हैं और इस नुकसान को अच्छी तरह समझ रहे हैं। पहले आंदोलन, बाद में कोरोना और आर्थिक मंदी के तिहरे नुकसान को व्यापारियों को सहना पड़ा है जिसके कारण लाखों लोगों के सामने रोजी-रोटी की समस्या पैदा हो गई थी।
उन्होंने कहा कि भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेने के बाद अब तक सरकार और पार्टी के नेताओं के साथ उनकी कई दौर की वार्ता हुई है। सबने उन्हें यह आश्वासन दिया है कि कानून के कारण किसी एक भी व्यक्ति की नागरिकता नहीं जाएगी। लेकिन जिस तरह एक मुस्लिम होने के बाद भी वे किसी दूसरे मुस्लिम देश में अचानक जाकर नहीं रह सकते, उसी प्रकार भारत में भी किसी को आने के लिए एक प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा।
क्या दोबारा आंदोलन शुरू होगा
आंदोलन के दुबारा शुरू होने की बात पर शहजाद ने कहा कि इस तरह की कुछ चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन इस बार आंदोलन को उस तरह समर्थन नहीं मिलेगा क्योंकि लोग इस तरह के आंदोलनों की सच्चाई समझ चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी अगर कुछ लोग आंदोलन शुरू करने की कोशिश करते हैं तो वे बातचीत के रास्ते को ही प्रमुखता देंगे।