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Shaheen Bagh News: दो गुटों में तनाव, बवाल की आशंका से सतर्क हुई पुलिस

Sun, 22 Mar 2020 04:40 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शाहीन बाग में लगा पोस्टर - फोटो : अमर उजाला
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शाहीन बाग के धरने में शनिवार रात प्रदर्शनकारी दो गुटों में बंट गए और जमकर आपस में मारपीट की है। दोनों पक्षों में बवाल इस हद तक बढ़ गया कि प्रदर्शनकारियों ने एक दूसरे पर जुते-चप्पल तक फेंकने शुरू कर दिए। प्रदर्शनकारियों का एक गुट कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए प्रदर्शन खत्म करने के समर्थन में था, जबकि दूसरा गुट अब भी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ धरना जारी करने के पक्ष में अड़ा हुआ है। 

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दोनों पक्षों में बवाल बढ़ने की सूचना पर मौके पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर हंगामे को शांत कराया। प्रदर्शनकारियों के एक पक्ष का कहना है कि शाहीन बाग के लोग देश में इस संकट की घड़ी में उनके साथ खड़े हैं इसलिए वह कोरोना वायरस को देखते हुए धरना खत्म करना चाहते हैं। 

इसके बावजूद कुछ बाहरी लोग प्रदर्शन में शामिल होकर उसे जारी रखना चाहते हैं और स्थानीय लोगों को धरने के लिए उकसा रहे हैं।

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हंगामे में कई प्रदर्शनकारी हुए चोटिल
शाहीन बाग प्रदर्शन में हंगामे के दौरान जमकर मारपीट हुई है। इस मारपीट में आधा दर्जन प्रदर्शनकारियों के चोटिल होने की सूचना है। पुलिस ने किसी तरह दोनों पक्षों को शांत करा पाई है। बवाल की आशंका के मद्देनजर धरना स्थल के आसपास पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

प्रदर्शन को जारी रखने के लिए जूता चप्पल रखा
शाहीन बाग में धरना तो चल रहा है, लेकिन इसमें में सिर्फ 5 लोगों को धरने पर बैठने की इजाजत मिली है। जूता चप्पल अलग रखा गया है। कोरोना को देखते हुए महिलाओं को हमजत सूट पहनने को कहा गया, हमजत सूट से शरीर पूरी तरह ढंका होता है। प्रदर्शन में पांच लोगों को बैठने की इजाजत है, जिसमें दादी और नानी शामिल हैं।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने शनिवार को इंडिया इस्लामिक सेंटर में शाहीनबाग के प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर बैठक की थी। यहां पर दिल्ली पुलिस ने कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए लोगों से प्रदर्शन खत्म करने की अपील की थी। इस बैठक में डीसीपी साउथ ईस्ट समेत दिल्ली पुलिस के कई अधिकारी भी मौजूद थे।

चार घंटे ही प्रदर्शन स्थल पर बैठने की इजाजत
शाहीनबाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में पिछले तीन महीने से चल रहे प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों ने कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए फैसला लिया है कि अब चार घंटे से ज्यादा प्रदर्शन स्थल पर बैठने की इजाजत नहीं होगी। 

प्रदर्शनकारी कनिज फातिमा ने बताया कि कोरोनावायरस महामारी की बढ़ती समस्या के कारण रविवार से यहां आने वाला कोई भी प्रदर्शनकारी सिर्फ चार घंटे ही धरनास्थल पर रहेगा, और उसके बाद वह यहां से चला जाएगा। यह व्यवस्था रविवार से लेकर कोरोनावायरस की समस्या समाप्त होने तक या कानून वापस होने तक जारी रहेगा।

 
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माइक से भी घोषणा का ऐलान
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि रविवार को जनता कर्फ्यू के दौरान धरनास्थल पर माइक से किसी तरह की कोई घोषणा नहीं होगी। प्रदर्शनकारियों ने यह भी फैसला किया है कि प्रदर्शनस्थल पर बच्चे और बुजुर्ग मौजूद नहीं होंगे और विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होगा।

प्रधानमंत्री के अपील के बाद लिया फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात आठ बजे कोरोनावायरस को देखते हुए सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक जनता कर्फ्यू का ऐलान किया है। इसके बाद ही प्रदर्शनकारियों का एक गुट धरना खत्म करने के पक्ष में खड़ा हो गया। लेकिन आरोप है कि कुछ लोगों की जिद से सैकड़ों की जान आफत में है।
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