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भाजपा का हाथ थामने वाले शाहीन बाग आंदोलन के आयोजक ने बताया, क्या थी प्रदर्शन की सच्चाई

Mon, 17 Aug 2020 11:55 AM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शाहीन बाग में हुए प्रदर्शन के एक प्रमुख आयोजक शहजाद अली ने 16 अगस्त को भाजपा ज्वाइन कर ली। सरकार विरोधी मंच से सीधे सत्तारूढ़ दल में शामिल होने की उनकी कोशिश को अलग-अलग नजर से देखा जा रहा है। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...
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Shaheen Bagh social activist Shahzad Ali joins BJP - फोटो : ANI
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विस्तार
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नागरिकता कानून के विरोध में शुरू हुआ शाहीन बाग का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में छा गया था। कई मायनों में यह केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध का प्रतिनिधि मंच बन गया था। इन अहिंसक और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बाद हुए दंगों ने इसकी साख धूमिल करने का काम किया। वहीं, शाहीन बाग में हुए प्रदर्शन के एक प्रमुख आयोजक शहजाद अली ने 16 अगस्त को भाजपा ज्वाइन कर ली। सरकार विरोधी मंच से सीधे सत्तारूढ़ दल में शामिल होने की उनकी कोशिश को अलग-अलग नजर से देखा जा रहा है।

प्रश्न- शहजाद अली, आप शाहीन बाग धरने के प्रमुख आयोजकों में से एक थे। सरकार विरोधी मंच से उठकर आप सीधे भाजपा में शामिल हो गए। किन कारणों से लगा कि अब आपको भाजपा में जाना चाहिए?

पहली बात तो यह कि आंदोलन के मंच से सीधे भाजपा में नहीं आया हूं। बीच में लंबा समय गुजरा है, जिसमें मैंने काफी कुछ सोचा-समझा है। मैंने देखा है कि किस तरह भोले-भाले लोगों के एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को विभिन्न लोगों ने अपनी-अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस्तेमाल किया है। इस बीच मैंने यह भी देखा है कि किस तरह सरकार की योजनाओं में किसी के साथ धार्मिक आधार पर कोई भेदभाव नहीं हुआ है। सरकार की योजनाओं का जितना लाभ हिंदू भाइयों को मिल रहा है, उतना ही हमारे मुस्लिम भाइयों को भी मिला है। ऐसे में मुझे लग रहा है कि इस मामले में राजनीति ज्यादा हुई है, जबकि सच्चाई कुछ और थी। मुसलमानों को यह सच्चाई समझने की जरूरत है।

प्रश्न- आज आप भाजपा से जुड़ चुके हैं, अब आपका नागरिकता कानून को लेकर क्या कहना है? क्या अब आप मानते हैं कि यह कानून सही है और इसमें मुसलमानों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है?

देखिए, आंदोलन की शुरुआत से ही एक बात बिलकुल स्पष्ट थी। हम केवल यह कह रहे थे कि सरकार की तरफ से कोई हमारे पास आये। हमसे बात करे, हमारे सवालों के जवाब दे। अगर हम गलत भी हैं तो हमारी गलतफहमियां दूर करे। हम आज भी वही काम करेंगे। हमारे जो भी सवाल होंगे, वे हम सीधे अपने नेताओं से, अपनी सरकार से करेंगे।

प्रश्न- आपको ऐसा नहीं लगता कि शाहीन बाग के प्रमुख चेहरे रहने के बाद अब भाजपा में शामिल होने पर लोग आपसे सवाल करेंगे, आपकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाएंगे?

आजादी से लेकर आज तक मुसलमानों के मन में सिर्फ एक ही बात बिठाई गई है कि आरएसएस-भाजपा (बाद में गठित) उनकी दुश्मन है। लेकिन हमारा कहना है कि कोई हमारा दोस्त है या दुश्मन, यह हम दूर से देखकर तो नहीं समझ सकते। सच्चाई जानने के लिए हमें उसके करीब जाना पड़ेगा। मैंने वही काम किया है। आज भी मैं उन्हीं जमीनी मुद्दों को उठाऊंगा, जिन्हें लेकर हमेशा से मेरी प्रतिबद्धता रही है।

प्रश्न- चर्चा है कि महमूद प्राचा जैसे कुछ लोग एक बार फिर शाहीन बाग का प्रदर्शन आयोजित कराने की तैयारी कर रहे हैं। अगर यह आंदोलन दुबारा शुरू होता है, तो आपकी भूमिका क्या रहेगी?

हां, मुझे भी जानकारी है कि कुछ लोग दोबारा प्रदर्शन आयोजित कराने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ये वही लोग हैं जिनके साथ दो आदमी भी नहीं हैं। उनकी असलियत भी देश के सामने आ चुकी है।  मुझे लगता है कि आपको जो भी सवाल करने हैं, वह व्यवस्था के एक अंग बनकर कीजिये। मैं पूरे देश से लाखों लोगों को भाजपा के साथ जोडूंगा। जो भी मुद्दे होंगे, पार्टी नेताओं के बीच उठाऊंगा।

प्रश्न- पुलिस का कहना है कि इन प्रदर्शनों के पीछे से दिल्ली दंगे की साजिश रची गई। पुलिस दिल्ली दंगों की जांच कर रही है। इसकी निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने भी सवाल खड़े किए हैं। आप क्या कहेंगे?

मुझे लगता है कि यह काम पुलिस और अदालतों के ऊपर छोड़ देना चाहिए। वे इसकी ज्यादा बारीक तहकीकात कर रहे हैं और वही ज्यादा अच्छी तरह बता सकते हैं कि इसके पीछे सच्चाई क्या थी, और साजिश क्या थी। लेकिन मैं इतना अवश्य कहूंगा कि इस प्रदर्शनों के पीछे कई लोग ऐसे रहे, जिन्होंने अपना राजनीतिक हित साधने की कोशिश की, भोले-भाले लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। बाकी का काम पुलिस और अदालत का है। इससे ज्यादा मैं कुछ और नहीं कह सकता।

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