शाहबेरी गांव में मानकों को ताक पर रखकर अवैध इमारत बनाने वाले एक बिल्डर को पुलिस ने दिल्ली के जामिया नगर क्षेत्र से मंगलवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने एक मामले में दर्ज मुकदमे में स्टे ले रखा था।
दूसरे में मुकदमा दर्ज कर यह गिरफ्तारी की गई है। आरोप है कि बिल्डर ने अवैध रूप से 118 से अधिक फ्लैटों का निर्माण कर बेचा था। पुलिस आरोपी के सहयोगियों की तलाश में जुटी है। मामला बिसरख कोतवाली क्षेत्र का है।
पुलिस के मुताबिक, मूलरूप से दिल्ली के जामिया नगर के अबु फजल एंक्लेव में रहने वाले उस्मान कुरैशी ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट के शाहबेरी गांव में अवैध रूप से फ्लैटों का निर्माण कर बेचा था। उसने प्योर विजन के नाम से प्रोजेक्ट शुरू किया और 118 फ्लैटों का निर्माण कर कई लोगों को बेचा दिया था।
आरोप है कि फ्लैट निर्माण से पूर्व ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण से नक्शा पास नहीं कराया गया था और न ही अन्य मानक पूरे किए थे। शाहबेरी में दो भवन गिरने की घटना के बाद अन्य बिल्डरों के साथ उस्मान पर भी केस दर्ज किया गया था। बाद में प्राधिकरण ने उस्मान के साझेदार तारिक पर मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस की जांच में आरोपी उस्मान के भी रजिस्ट्री में हस्ताक्षर होने की पुष्टि हुई। पुलिस ने बताया कि कानूनों का उल्लंघन कर फ्लैटों को बेचा गया और लोगों को धोखे में रख रजिस्ट्री कराई। इससे लोगों की जान खतरे में पड़ी। कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार पाठक के अनुसार बिल्डर के खिलाफ साल 2018 में कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
उस पर आरोपी ने उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी पर स्टे ले रखा था। प्राधिकरण ने दूसरा मुकदमा दर्ज कराया। उसमें जांच के बाद गिरफ्तारी हुई है। अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
43 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
बीते साल शाहबेरी में दो इमारतें गिर गई थी। मलबे में दबने से 9 लोगों की मौत हो गई थी। मामला राष्ट्रीय स्तर पर छा गया। अभी तक कुल 86 केस दर्ज हैं। इनमें से 71 अवैध निर्माण से जुड़े और 15 में गैंगस्टर एक्ट लगाकर कार्रवाई की गई है। 43 आरोपियों की अभी तक गिरफ्तार हो चुकी है।
शेष 53 ने कोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले रखा है। प्राधिकरण ने दिल्ली आईआईटी की टीम से 426 इमरातों का सुरक्षा ऑडिट कराया था। बताया गया है कि ऑडिट पूरा हो गया है। प्राधिकरण खतरनाक इमारतों को गिराने जैसा कदम उठा सकता है।