देश के हिंदू-मुस्लिमों के बीच दरार डाली जा रही है। 85 फीसदी बहुसंख्यक आबादी पर नियंत्रण पाने का प्रयास हो रहा है। देश का विकास करने के लिए लोगों को धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि बहुत अमीर, अमीर, गरीब और बहुत गरीब की श्रेणी में बांटा जाना चाहिए।
लोगों को महंगाई, रोजगार, आवास, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर सोचने नहीं दिया जा रहा है। ये बातें बुधवार को गीतकार जावेद अख्तर और अभिनेत्री शबाना आजमी ने झंडापुर में सफदर हाशमी के शहादत दिवस कार्यक्रम में कहीं।
प्रसिद्ध रंगकर्मी सफदर हाशमी के 31वें शहादत दिवस पर सीटू की ओर से आयोजित कार्यक्रम में गीतकार जावेद ने कहा कि आज हिंदू-मुसलमानों के बीच दरार डाली जा रही है, इस प्रयास के परिणाम सुखद नहीं होंगे। 1947 में मुस्लिमों के लिए पाकिस्तान को बनाया गया था लेकिन वहां मुस्लिम सुकून में नहीं हैं।
उससे बेहतर स्थिति में आज भी हिंदुस्तान के मुस्लिम हैं। सरकार पर लोगों के विभाजन का आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई को बांटा जा रहा है। जबकि देश का विकास करना है तो उसे बहुत अमीर, अमीर, गरीब और बहुत गरीब की श्रेणी में बांटा जाना चाहिए।
लोगों को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और भोजन जैसे मूलभूत अधिकारों के बारे में सोचने नहीं दिया जा रहा है। देश में गर्व से कहो हम हिंदू हैं का नारा लगवाया जा रहा है, लेकिन इससे समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने अफगानिस्तान, म्यांमार समेत तीन मुल्कों में रह रहे लोगों को आने की इजाजत पर सवाल खड़ा किया। कहा कि शरणार्थी की कोई जात या धर्म नहीं होती। इसलिए देश में ऐसा कानून होना चाहिए जिसमें धार्मिक भेदभाव ना हो।
जावेद अख्तर ने सरकार से कहा कि आप आम हिंदुस्तानी से कैसे पूछोगो कि वह हिंदुस्तानी है। आदिवासी, एससीएसटी और गरीब के पास यदि प्रमाण नहीं है तो सरकार उन्हें कहां भगा देगी।
सरकार के पास 10-12 करोड़ की आबादी को रखने के लिए डिटेंशन सेंटर की व्यवस्था है। क्या वह उन लोगों को रखकर महीनों तक खाना देंगे। लोगों को समझाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे लोगों से मतदान का अधिकार छीनना चाहती है।
शबाना आजमी ने महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। कहा कि सरकार सीएए के जरिए मूलभूत मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने ‘कमाने वाला..खाएगा, लूटने वाला..जाएगा और नया जमाना..आएगा’ नारा लगवाकर सरकार पर कटाक्ष किया।
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि सफदर हाशमी क्रांतिकारी थे। देश में धर्मनिरपेक्षता कायम रखने के लिए काम किया। उनके नाटक भी सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ने के लिए थे। वह कहते थे कि देश में सांप्रदायिकता और भाईचारे को समाप्त करने का काम होगा, आज वही हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून से संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नागरिकता रजिस्टर में यदि अफसर संतुष्ट नहीं हुए तो आपकी नागरिकता पर सवाल खड़े करेंगे। येचुरी ने कहा कि देश के संविधान को बचाना है। सरकार कहती है कि नागरिकता कानून से किसी को खतरा नहीं है लेकिन कानून में आपसे जानकारी के लेने के बाद एक अधिकारी उसका मूल्यांकन करेगा, जो किसी भी परिवार के नाम पर प्रश्नचिन्ह लगा सकता है।
अब जिस परिवार के ऊपर चिन्ह लगेगा, वह पुराने कागजात कहां से लाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ आने के बाद हजारों परिवारों की झोपड़ी तक बह गई। उनके ग्राम प्रधान और पंचायत के लोग कागजात नहीं बना रहे हैं।
वह लोग आज इस कानून से परेशान हैं। असम में करीब 20 लाख लोग इस कानून से बाहर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अब देश को बचाने के लिए नया नारा होगा ‘मोदी-शाह सावधान, हम बचाएंगे संविधान’।
इस मौके पर ‘हल्ला बोल’ किताब का विमोचन किया गया। सफदर हाश्मी हत्याकांड और उसके बाद का घटनाक्रम है। बुधवार को झंडापुर के अंबेडकर पार्क में हुए कार्यक्रम का आयोजन सीटू और जन नाट्य मंच ने संयुक्त रूप से किया।