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जश्न-ए-अदब का समापन, शबाना आजमी और जावेद अख्तर ने बनाया माहौल को खुशगवार

Mon, 04 Mar 2019 05:17 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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जश्न ए अदब - फोटो : अमर उजाला
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लाई फिर एक लफ्ज से मस्ताना तेरे शहर में, फिर बनेंगी मस्जिदें मयखाना तेरे शहर में..., आज फिर टूटेंगी तेरी घर की नाजुक खिड़कियां, आज फिर देखा गया दीवाना तेरे शहर में....। कैफी आजमी की इस शायरी को सुनकर माहौल तब शायराना हो गया, जब जावेद अख्तर ने इसे पेश कर सबका दिल जीत लिया।
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मौका था जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी में साहित्योत्सव जश्न-ए-अदब के आखिरी दिन का। कैफी आजमी की बेटी एवं अभिनेत्री शबाना आजमी की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और भी संजीदा और मनोरंजक बना दिया। अमर उजाला ने कार्यक्रम में बतौर मीडिया पार्टनर भागीदारी निभाई।

समारोह की शुरुआत महजिया मुशायरे से हुई। असद रजा, चांद फटाफट, इमरान धामपुरी, शाहिद गड़बाद, इकबाल फिरदौसी, डॉ अनस फैजी और नश्तर अमरोहवी ने अपनी शायरी से न केवल छात्र-छात्राओं का मनोरंजन किया, उन्हें इसकी बारीकियां भी समझाईं।
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कार्यक्रम गुलशन में शायर मुजतर खैराबादी के शायरी संग्रह पर उनके पोते जावेद अख्तर और अली अहमद फातीमी ने औबेद आजम आजमी से चर्चा की। इस पुस्तक को जावेद अख्तर ने तैयार किया है। उन्होंने अपने दादा द्वारा लिखी शायरी की पक्तियां पढ़कर छात्रों को शायरी के ऐतिहासिक सफर से रूबरू करवाया।

कैफी के नाम रहा आखिरी दिन
साहित्योत्सव का आखिरी दिन कैफी आजमी के नाम रहा। ‘कैफी आजमी: फन और शख्सियत’ विषय पर शबाना आजमी, जावेद अख्तर और औबेद आजम आजमी ने चर्चा की। सत्र की शुरुआत कैफी आजमी की शायरी से हुई।  

 
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शबाना आजमी ने यह कहा

शबाना आजमी ने कहा कि कैफी आजमी मेरे वालिद ही नहीं, मेरे दोस्त और गुरु थे। वह वो शख्सियत थे, जिन्होंने हमेशा उन्हें जिन्दगी जीने के बेहतर तरीके सिखाए। कैफी साहब ने उन्हें सिखाया कि तुम किसी भी काम को लगन से कर रहे हो तो तुम्हारी मेहनत का फल जरूर मिलता है, चाहे वह तुम्हारे जाने के बाद ही क्यों न मिले।

जब उन्हें पहली बार बॉलीवुड में जाने का मौका मिला तो सबसे पहले अपने वालिद से अनुमति मांगी। उन्होंने कहा कि तुम जो भी काम करो उसे सबसे बेहतर तरीके और लगन से करो, चाहे तुम्हें मोची का काम ही क्यों न पसंद हो।

जावेद अख्तर ने कहा कि बॉलीवुड की दुनिया में कैफी आजमी से ज्यादा फिल्में देने वाले कलाकार भी मौजूद थे फिर भी वह एक महान शख्सियत के रूप में पहचाने गए। उनकी शायरी में मैनें मोहब्बत के बहुत से पड़ाव देखे, लेकिन कभी टूटा हुआ या मोहताज नहीं देखा। कैफी आजमी एक मात्र ऐसे शायर हुए, जिनकी शायरी में कभी खुद के स्वाभिमान को नीचे नहीं दिखाया गया। उनकी शायरी के अंदाज ने शायरों की दुनिया में उनकी एक अलग पहचान बनाई, जिसके लिए उनके चाहने वालों की अलग फेहरिस्त बन गई। 

विजेता प्रतिभागियों को किया पुरस्कृत
साहित्योत्सव में छात्रों के लिए ओपन माइक सेशन आयोजित किया गया। इसके साथ ही बुक रिलीज और पुस्तक चर्चा भी की गई। कैफी आजमी की शायरी पर सुलेख प्रतियोगिता में छात्रों ने अपना कौशल दिखाया। साहित्योत्सव के दौरान आयोजित की गई पोस्टर मेकिंग, पेपर प्रजेंटेशन, डिबेट और निबंध लेखन प्रतियोगिता की विभिन्न श्रेणियों में जीतने वाले 15 छात्रों को शबाना आजमी और जावेद अख्तर द्वारा पुरस्कृत किया गया।
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