अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले में मध्य प्रदेश के कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सजा पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने कहा कि सजा पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता। हालांकि, ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील लंबित होने के कारण उनकी तीन साल की जेल की सजा पर पहले से लगी रोक फिलहाल जारी रहेगी।
राजेंद्र भारती को इसी मामले में दोषसिद्धि के बाद विधायक पद के लिए अयोग्य घोषित किया गया था। उन्होंने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि यदि सजा पर रोक लगा दी जाए तो उनकी विधानसभा सदस्यता पर लगी अयोग्यता समाप्त हो सकती है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया।
मामला दतिया स्थित जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में एक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, वर्ष 1998 में भारती की दिवंगत मां सावित्री ने परिवार से जुड़े एक ट्रस्ट के नाम 10 लाख रुपये की एफडी तीन वर्ष के लिए 13.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर कराई थी। आरोप है कि एफडी की अवधि पूरी होने के बाद बैंक रिकॉर्ड में करेक्शन फ्लूइड और ओवरराइटिंग के जरिए अवधि को 10 और 15 वर्ष तक दर्शाया गया। इसके आधार पर वर्ष 2011 तक ट्रस्ट को ऊंची ब्याज दर पर भुगतान मिलता रहा, जबकि इस दौरान बाजार में ब्याज दरें काफी कम हो चुकी थीं।
ट्रायल कोर्ट ने तीन साल की कारावास की सजा सुनाई थी
ट्रायल कोर्ट ने भारती को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।