राजधानी के थानों में महिला अभियुक्तों से यौन शोषण व उनको प्रताड़ित करने संबंधी वारदातों को रोकने के लिए रिहायशी क्षेत्र में अलग से पुलिस लॉकअप बनाने की मांग को याचिका दायर की गई है।
हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र व दिल्ली सरकार के अलावा पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर जबाव तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने तीनों पक्षों को अपना जबाव 10 सितंबर तक दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता अवध कोशिक ने दायर की है। उन्होंने कहा कि महिला अभियुक्तों से यौन शोषण, प्रताड़ना, उनसे बुरा बर्ताव को रोकने के लिए आपराधिक मामलों में गिरफ्तार महिलाओं को रखने के लिए अलग से पुलिस लॉकअप की अत्यंत जरूरत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को गिरफ्तारी के दौरान तय कानून का भी उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को रात के समय व बिना महिला पुलिसकर्मियों के गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने अदालत के समक्ष रोहिणी में दर्ज दो अलग मामलों का हवाला देते हुए कहा कि इन मामलों में संबंधित मजिस्ट्रेट की इजाजत लिए बिना दो महिलाओं को रात के समय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इतना ही नहीं उनकी गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ कोई भी महिला पुलिसकर्मी साथ नहीं थी।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने तुंरत इन महिलाओं को संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया और अगले दिन अदालत में पेश किया गया। दोनों महिलाओं ने आरोप लगाया कि रात को पुरुष पुलिसकर्मियों ने लॉकअप में उनको प्रताड़ित करने के अलावा छेड़छाड़ भी की।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि राजधानी के थानों के लॉकअप का रात के समय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया जाए। इसके अलावा पुलिस आयुक्त को मानवाधिकार व महिला अधिकारों का हनन करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी निर्देश देने का आग्रह किया।