नोएडा में अब सेंसर वाले ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएंगे। यह सिग्नल रास्ते पर ट्रैफिक का दबाव देखकर वाहनों को रुकने या जाने का सिग्नल देंगे। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण ने सोमवार को सीव्यू डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और जंकिट सिस्टम के साथ करार किया। पहले चरण में शहर के तीन चौहरों टेलीफोन एक्सचेंज, टी-सीरीज और रजनीगंधा पर इस तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा।
इस पर होने वाले 38.40 लाख रुपये के खर्च को सीएसआर फंड के अंतर्गत जुटाया जाएगा। बुधवार को हुए करार के तहत एमपी-3 रोड पर 5.8 किलोमीटर लंबी सड़क पर आठ तिराहे-चौराहे, डीएसएसी रोड के 6.2 किलोमीटर लंबी सड़क के आठ तिराहों व चौराहे और उद्योग मार्ग के 3.1 किलोमीटर लंबी सड़क पर 13 बड़े इंटरसेक्शन पर ट्रैफिक की सघनता को कम करने के लिए एडेप्टिव ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम की आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए सुधार करने की योजना है।
प्राधिकरण के जीएम राजीव त्यागी ने बताया कि इस काम को पूरा करने के लिए एक वर्ष का समय निर्धारित किया गया है। इससे प्राधिकरण क्षेत्र की प्रमुख मार्गों को ट्रैफिक के आवागमन हेतु और अधिक सुविधापूर्ण बनाया जा सकेगा। इस योजना की सफलता के बाद इसे अन्य स्थानों पर लगाने के लिए कार्य योजना तैयार होगी। करार के माध्यम से प्राधिकरण को तकनीकी और आर्थिक सहयोग मिलेगा। बुधवार को करार के दौरान प्राधिकरण के सीईओ आलोक टंडन, कैंडोर टेक स्पेस के सीईओ और एमडी आलोक अग्रवाल, जंकिट सिस्टम के सीईओ शांतनु शर्मा और प्राधिकरण के एसीईओ राकेश कुमार मिश्र उपस्थित रहे।
एडेप्टिव ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम तकनीक
एडेप्टिव ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम तकनीक सेंसर पर आधारित होगी। यही नहीं ट्रैफिक के मूवमेंट को सीसीटीवी कैमरों की मदद से कैच किया जाएगा। कई बार ऐसा होता है कि सिग्नल हरा होने के बावजूद पीछे गाड़ियां नहीं होती। ऐसे में समय बर्बाद होता है। पुराने मैनुअल ट्रैफिक सिग्नल में उतने सेकेंड का टाइम दर्ज होता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब अगर किसी चौराहे पर किसी रास्ते पर गाड़ियां नहीं होंगी तो उस ओर ट्रैफिक सिग्नल खुद ब खुद लाल हो जाएगा और दूसरे कैरेज की लाइट हरी हो जाएगी।