पूर्वांचल वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए अधिकतर नेताओं ने किसी पूर्वांचली नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि इस साल के अंत में बिहार और डेढ़ साल बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में दिल्ली से पूर्वांचल को प्रतिनिधित्व देना रणनीतिक रूप से उपयोगी हो सकता है।
प्रदेश भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए संगठनात्मक हलचल तेज हो गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने नए अध्यक्ष के चयन के लिए फीडबैक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस सिलसिले में केंद्रीय नेतृत्व ने दिल्ली के सांसदों, मंत्रियों, महापौर और वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की है।
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बताया जा रहा है कि इनमें से आधे से अधिक नेताओं ने वर्तमान अध्यक्ष की जगह किसी नए चेहरे को जिम्मेदारी सौंपने की सिफारिश की है। पूर्वांचल वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए अधिकतर नेताओं ने किसी पूर्वांचली नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि इस साल के अंत में बिहार और डेढ़ साल बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में दिल्ली से पूर्वांचल को प्रतिनिधित्व देना रणनीतिक रूप से उपयोगी हो सकता है।
वहीं, कुछ नेताओं ने दलित समुदाय से किसी कर्मठ और जमीन से जुड़े नेता को अध्यक्ष पद देने की वकालत की है। उनका तर्क है कि इससे भाजपा की सामाजिक समावेशिता का संदेश जाएगा। वहीं, एक-दो नेताओं ने सुझाव दिया है कि दिल्ली की बाहरी विधानसभाओं और ग्रामीण सीटों पर ओबीसी या फिर जाट समुदाय से किसी लोकप्रिय चेहरे को कमान दी जाए।
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सक्रिय हुए दावेदार गांवों में बढ़ी हलचल
अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल संभावित दावेदारों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। आलाकमान को साधने की कोशिशों के साथ-साथ अब ये नेता अपने-अपने आकाओं के पास चक्कर लगाने लगे हैं। इन नेताओं में कई सांसद व विधायक और पूर्व सांसद व पूर्व विधायक शामिल हैं। केंद्रीय नेतृत्व संगठनात्मक जरूरतों और चुनावी रणनीतियों के आधार पर लेगा।