बुधवार शाम मीडिया से बातचीत में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सीलिंग का ठोस व स्थायी समाधान निकालने के लिए पिछले एक हफ्ते में उपराज्यपाल, डीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों समेत सभी हितधारकों के साथ खुद उनकी बैठक हुई है।
इसके बाद मास्टर प्लान में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। दो फरवरी को डीडीए की बोर्ड बैठक में इसके मंजूर होने की उम्मीद है।
पुरी ने बताया कि अभी डीडीए की बोर्ड बैठक होनी है। प्रस्ताव वहीं से मंजूर होगा। ऐसे में इसकी डिटेल में जाना उपयुक्त नहीं होगा। फिर भी, मोटे तौर पर दुकान के साथ बनी रिहायशी इमारतों, व्यावसायिक कांप्लेक्स, सड़क व गली, स्थानीय बाजारों, आवासीय इलाकों के एफएआर में एकरूपता लाई जाएगी।
वहीं, एफएआर को बढ़ाने की भी योजना है। बेसमेंट में भी व्यावसायिक गतिविधियों का इजाजत मिलेगी। दूसरी तरफ दुकान वाली आवासीय इमारतों में बगैर रजिस्ट्रेशन काम करने वालों पर लगाई गई पेनल्टी में कमी करने के साथ कनवर्जन चार्ज भी कम होगा।
हालांकि, सूत्रों की मानें तो मौजूदा 180 के एफएआर को करीब डेढ़ गुना किया जा सकता है। वहीं, दस गुना कनवर्जन चार्ज के सिर्फ दो गुना होने की भी उम्मीद है।
पुरी ने बताया कि दिल्ली के कारोबारी फिलवक्त सीलिंग से डरे हैं। ऐसे में फैसला लिया गया है कि मास्टर प्लान में संशोधन करने से पहले लोगों की राय लेने का पहले से तय 45 दिन का वक्त तीन दिन कर दिया जाए।
इसमें मिले सुझावों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद डीडीए सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर करेगी। इससे कारोबारियों को तत्काल राहत मिलेगी।
हालांकि, पुरी ने जोर देते हुए कहा कि सीलिंग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर बनी कमेटी की निगरानी में चल रही है। वहीं, वह किसी पर आरोप-प्रत्यारोप नहीं लगा रहे हैं। उनकी कोशिश समस्या का स्थायी समाधान देने की है।
पुरी के ऐलान पर आम आदमी पार्टी प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उनकी पार्टी पिछले दो महीने से कह रही है कि सीलिंग को रोकने की ताकत केंद्र सरकार के पास है।
लेकिन भाजपा दिल्लीवासियों को गुमराह कर रही है। बुधवार के पुरी के ऐलान से दूध का दूध व पानी का पानी हो गया है।