मामले में एमिकस क्यूरी रंजीत कुमार ने कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया था। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि लैंड एंड डेवलपमेंट कार्यालय जानबूझकर दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ सीलिंग प्रक्रिया को रोक रहा है। उसके अधिकारी निगरानी समिति की बैठक में नहीं आते और पैनल के फोन का जवाब भी नहीं देते।
सीलिंग से पूर्व नोटिस की शर्त पर मांगा था जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सीलिंग से पहले 48 घंटे का नोटिस दिए जाने की शर्त खत्म करने पर जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2004 में अवैध इकाइयों को सील करने के लिए निगरानी समिति का गठन हुआ था। केंद्र ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेश में कहा गया है कि सीलिंग से 48 घंटे पूर्व नोटिस दिया जाएगा, जबकि निगरानी समिति का कहना है कि नोटिस नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने 48 घंटे पूर्व नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इसकी क्या जरूरत है।