फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली में सीलिंग पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- रुकावट पैदा कर रहा मंत्रालय

Wed, 24 Oct 2018 05:58 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

दिल्ली में अवैध निर्माण करने वालों को सीलिंग नोटिस जारी करने की प्रक्रिया तय नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवासीय एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि मंत्रालय के रवैये से सब कुछ रुक गया है। जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से कहा, ‘क्यों आपका मंत्रालय सब कुछ रोक रहा है। आप इसमें अड़गां लगा रहे हैं। एक तय प्रक्रिया के लिए दो स्थगन लाए गए। ये क्या हो रहा है। ये बहुत ज्यादा है।’

विज्ञापन


इस पर नाडकर्णी ने पीठ को बताया कि रूल बुक को ध्यान में रखकर इस पर विचार कर रहा है। पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हमें छोड़कर हर कोई एक दूसरे को दोषी ठहरा रहा है। सभी का यही रवैया है। हमें वह रूल बुक दिखाइये और एक बार सभी के लिए इसे अंतिम रूप दें।  

एसटीएफ से भी नाराजगी जताई
सुनवाई के दौरान पीठ ने इस मुद्दे पर 25 अप्रैल के आदेश के बाद बनाई गई स्पेशल टास्क फोर्स के रिपोर्ट नहीं देने पर भी नाराजगी जताई। जस्टिस लोकुर ने कहा कि हम यहां क्या करने के लिए है? डीडीए के वाइस चेयरमैन, एलएंडडीओ और यहां तक की आपका मंत्रालय भी कुछ नहीं कर रहा है। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि हम यहां क्या कर रहे हैं। इसके बाद नाडकर्णी ने पीठ को बताया कि वह नोटिस जारी करने की तय प्रक्रिया के साथ कोर्ट के समक्ष पेश होंगे। मामले की अगली सुनवाई 31 अक्तूबर को होगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

'जानबूझकर सीलिंग प्रक्रिया रोकी जा रही'

मामले में एमिकस क्यूरी रंजीत कुमार ने कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया था। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि लैंड एंड डेवलपमेंट कार्यालय जानबूझकर दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ सीलिंग प्रक्रिया को रोक रहा है। उसके अधिकारी निगरानी समिति की बैठक में नहीं आते और पैनल के फोन का जवाब भी नहीं देते। 

सीलिंग से पूर्व नोटिस की शर्त पर मांगा था जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सीलिंग से पहले 48 घंटे का नोटिस दिए जाने की शर्त खत्म करने पर जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2004 में अवैध इकाइयों को सील करने के लिए निगरानी समिति का गठन हुआ था। केंद्र ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेश में कहा गया है कि सीलिंग से 48 घंटे पूर्व नोटिस दिया जाएगा, जबकि निगरानी समिति का कहना है कि नोटिस नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने 48 घंटे पूर्व नोटिस पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इसकी क्या जरूरत है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें