सुप्रीम कोर्ट ने पूर्वी दिल्ली केएक परिसर की सील तोडने केमामले में सांसद मनोज तिवारी को फटकार लगाते हुए कहा है कि सांसद ने ऐसा वाहवाही लूटने केलिए किया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सांसद को अवमानना से मुक्त कर दिया।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने अपने आदेश में कहा है है कि हम इस बात से बेहद आहत हैं जिस तरह से सांसद ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए परिसर की सील तोड़ी।
पीठ ने कहा कि हम इसलिए भी आहत हैं कि वह चुने हुए सांसद हैं और एक जिम्मेदार नागरिक होने केनाते हुए उन्हे कानून को अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए था। पीठ ने तिवारी को %बिना किसी कारण के विद्रोही बनना’ बताते हुए कहा कि लोगों का प्रतिनिधि होने केबावजूद उन्होंने कानून का उल्लंघन किया।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह देखते हुए गत 19 सितंबर को सांसद तिवारी केखिलाफ शुरू अवमानना की कार्रवाई को खत्म कर दिया कि सीलिंग और डीसीलिंग का काम अदालत द्वारा नियुक्त निगरानी कमेटी केद्वारा नहीं किया जा रहा था।
लेकिन पीठ ने तिवारी द्वारा गैरजिम्मेदाराना तरीके से मॉनिटरिंग कमेटी पर आरोप लगाने पर कड़ी आपत्ति जताई। तिवारी ने आरोप लगाया था कि मॉनिटरिंग कमेटी भ्रष्ट अधिकारियों केसाथ रैकेट चला रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि तीन अक्टूबर को सुनवाई केबाद छाती ठोककर वाहवाही लूटना और इस अदालत द्वारा नियुक्त कमेटी पर फालतू आरोप लगाना यह दर्शाता है कि वह रूल ऑफ लॉ का सम्मान नहीं करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने तिवारी केइस जवाब पर भी अफसोस जताया कि सीलिंग की कार्रवाई को सही बताते हुए उनका यह कहना कि वह चर्चित नेता है और चूंकि उस दिन वहां 1500 लोगों की भीड़ थी इसलिए परिसर का सीलिंग तोड़कर उन्होंने सांकेतिक विरोध जताया था।
पीठ ने कहा कि हम तिवारी केखिलाफ अवमानना केमुकदमे को नहीं बढ़ाना चाहते हैं। पीठ ने कहा कि हम आशा करते हैं कि उन्हें सुबुद्धि आएगी। तिवारी पर कार्रवाई क्या होनी चाहिए यह उनकी पार्टी पर छोड़ दिया गया है।
मालूम हो कि मनोज तिवारी का कहना था कि गोकुलपुर के जिस परिसर की सील तोडने का आरोप है, उसका मॉनिटरिंग कमेटी से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने अदालत केआदेश की अवेहलना नहीं की है।
पूर्वी दिल्ली नगर निगम केअधिकारियों ने उस परिसर को सील किया था और वह भी बिना कोई नोटिस जारी किए। तिवारी ने यह भी आरोप लगाया था कि मॉनिटरिंग कमेटी पब्लिसिटी केलिए ऐसा कर रही है। कमेटी लोगों में भय पैदा करने की कोशिश कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट केआदेश की आड़ में कमेटी पिक एंड चूज की नीति अपना रही है।