- राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक आरोपी सुखराम मीणा को भ्रष्टाचार मामले में बरी किया
- शिकायतकर्ता ने उन पर 25 हजार रिश्वत मांगने का लगाया था आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने रिश्वत मांगने के आरोपी एसडीएमसी के स्वच्छता निरीक्षक को आरोपों से बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश जगदीश कुमार ने कहा कि आपराधिक न्यायशास्त्र का यही सिद्धांत है कि जब तक अभियुक्त को उचित संदेह से परे दोषी साबित नहीं कर दिया जाता, तब तक वह निर्दोष माना जाता है। न्यायाधीश ने कहा कि मामले को साबित करने के लिए स्पष्ट और ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं। ऐसे में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य, उचित संदेह से परे अपने मामले को साबित करने और अभियुक्त को आरोपित अपराधों का दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने इसी आधार पर अभियुक्त को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया और उसका जमानत बांड रद्द कर दिया।
शिकायतकर्ता रविन्द्र कुमार, जो पश्चिमी क्षेत्र के दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के वार्ड-13-एस में स्वच्छता मार्गदर्शक के पद पर कार्यरत है और उसकी देखरेख में 15 स्थायी और 15 अस्थायी कर्मचारी काम करते हैं। उन्होंने दक्षिणी वार्ड-13-एस के स्वच्छता निरीक्षक सुखराम मीणा के खिलाफ 26 अप्रैल, 2019 को रिश्वत मांगने के आरोप में एक शिकायत दर्ज करवाई। आरोप लगाया कि 25 अप्रैल, 2019 को अभियुक्त शिकायतकर्ता से पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर स्थित एक मॉल के सामने नाले के पास मिला और 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने कहा कि अगर उसे रिश्वत नहीं दी गई तो उसकी देखरेख में काम करने वाले अस्थायी कर्मचारियों का उपस्थिति रजिस्टर या मस्टर रोल पास नहीं किया जाएगा। शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने एसपी, सीबीआई, एसीबी को शिकायत दर्ज कराई और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया।