दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) का बजट इस वर्ष आम लोगों की जेब पर संपत्ति कर की मार पड़ सकती है। शुक्रवार को एसडीएमसी का प्रस्तावित बजट पेश किया गया, जिसमें मध्यम वर्ग को ऊपरी वर्ग में शामिल करके संपत्ति कर को दो प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं संपत्ति हस्तांतरण (कंवर्जन) शुल्क में भी एक प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का भी प्रस्ताव है। इसके साथ ही लोगों पर पेशेवर शुल्क भी लागू करने की सिफारिश की गई है।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर में शुक्रवार को एसडीएमसी का वर्ष 2020 के लिए प्रस्तावति बजट निगमायुक्त ज्ञानेश भारती ने पेश किया। उन्होंने बजट प्रस्ताव रखते हुए संपत्ति कर की श्रेणी में निगम के निर्धारित राजस्व के लक्ष्य की पूर्ति हेतू मध्यम वर्ग के लिए संपत्ति कर दो प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।
इस प्रस्ताव में कहा गया कि वित्त वर्ष 2020-21 के लिए संपत्ति कर के राजस्व का लक्ष्य बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है, जबकि वित्तीय वर्ष 2019-20 में यह लक्ष्य 800 करोड़ रुपए था। बीते वर्ष संपत्ति कर से एसडीएमसी ने 945 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया था। वित्तीय वर्ष 2018-19 में करदाताओं की संख्या 3,62,173 थी जो 2019-20 में बढ़कर 3,83,395 हो गई है।
प्रस्ताव में बताया गया कि अभी तक संपत्ति कर आवासीय, वाणिज्यिक और गैर आवासीय सम्पत्ति कर को तीन श्रेणियों ए-बी, सी-डी-ई और एफ-जी-एच में विभाजित किया गया था, जिनके तहत ए-बी श्रेणी से 12 प्रतिशत संपत्ति कर वसूला जाता था, सी-डी-ई से 10 प्रतिशत और एफ-जी-एच श्रेणी की संपत्तियों से 7 प्रतिशत संपित्त कर वसूला जाता था।
इस वित्तीय वर्ष में तीन श्रेणियों को घटाकर दो करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत ए-बी और सी-डी-ई को मिलाकर एक श्रेणी बनाने की बात कही गई है। अगर इन दोनों श्रेणियों के मिलाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो जिन संपत्तियों से पहले सी-डी-ई श्रेणी में 10 प्रतिशत संपत्ति कर वसूला जाता था, उनसे भी 12 प्रतिशत संपत्ति कर वसूला जाएगा। जबकि एफ-जी-एच श्रेणी की संपत्तियों के लिए कर में कोई बदलाव नहीं किया गया है, इस श्रेणी की संपत्तियों को 7 प्रतिशत ही कर देना होगा।
कंवर्जन शुल्क भी एक प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव
प्रस्तावित बजट में कंवर्जन शुल्क को भी एक प्रतिशत बढ़ाने की सिफारिश की गई है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए कंवर्जन शुल्क के निर्धारित लक्षय को 700 करोड़ रुपए रखा गया है। कंवर्जन शुल्क बढने से भी एसडीएमसी के तहत रहने वाले लोगों की जेब पर आर्र्थिक भार बढ़ेगा।
पिछले वित्तीय वर्ष में भी कंवर्जन शुल्क का निर्धारित लक्ष्य 700 करोड़ रुपए रखा गया था, जिसमें से निगम ने 637 करोड़ का राजस्व किया था। इस वित्तीय वर्ष में नियम अब तक 700 करोड़ में से 491 करोड़ रुपए अर्जित कर चुका है, जो गत वर्ष अगस्त तक के 396 करोड़ रुपए के मुकाबले 95 करोड़ रुपए (24 प्रतिशत) अधिक है।
अब लोगों को देना पड़ सकता है पेशेवर कर
वित्तीय वर्ष 2020-21 में लोगों पर पेशेवर कर (प्रोफेशनल टैक्स) लगाए जाने का भी प्रस्ताव पेश किया गया। इस प्रस्ताव के तहत 20 हजार रुपए तक की आमदनी वाले लोगों को कर की श्रेणी से मुक्त रखा गया है, जबकि 20001 रुपए से 50000 रुपए तक कमाने वाले लोगों से 100 रुपए प्रतिमाह और 50000 रुपए से अधिक कमाने वाले लोगों से 200 रुपए प्रतिमाह वसूलने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि पिछले वर्षों में पेश किए गए बजट में भी यह प्रस्ताव रखा जा चुका है, लेकिन अभी तक इस प्रस्ताव को एक बार भी मंजूरी नहीं मिली है।