दिल्ली में जानलेवा साबित हो रही प्रचंड गर्मी के बीच उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने प्रशासन की सुस्ती को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने राहत कार्यों की समीक्षा के बाद दो-टूक शब्दों में कहा है कि इस भीषण आपदा में दिल्लीवासियों को राहत देने में किसी भी प्रकार की ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है। दिल्ली के उन 5 जिलों में, जहां अब तक कूलिंग जोन शुरू नहीं हो पाए हैं, उन्हें बृहस्पतिवार शाम तक हर हाल में चालू किया जाए।
एलजी ने अधिकारियों को साफ किया है कि पीएम नरेंद्र मोदी दिल्ली में राहत कार्यों की निगरानी स्वयं कर रहे हैं। उन्हें दिल्ली की सारी सरकारी मशीनरी राहत कार्य के लिए सड़कों पर नजर आनी चाहिए। दरअसर, एलजी संधू ने समीक्षा बैठक में पाया कि दिल्ली के मात्र 8 जिलों में ही अबतक कूलिंग जोन खुल पाए हैं, बाकी 5 जिलों में ये अबतक नहीं खुले हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि इन शेष जिलों में भी बृहस्पतिवार को देर शाम तक हर हाल में ये जोन चालू हो जाने चाहिए।
कूलिंग जोन बन रहे हैं संजीवनी
इस जानलेवा गर्मी के बीच मजदूरों, रिक्शा चालकों और दैनिक वेतन भोगियों के लिए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) द्वारा बनाए गए चलते-फिरते राहत केंद्र और कूलिंग जोन संजीवनी साबित हो रहे हैं। एलजी ने कहा है कि प्रशासन का ये कदम न केवल आम जनता को राहत देने वाला है, बल्कि दिल्ली के 13 जिलों में तैनात मोबाइल रिलीफ यूनिट्स और 24 घंटे खुले कूलिंग सेंटर्स ने अब तक लाखों लोगों को गर्मी के थपेड़ों से सुरक्षित बचाने में कामयाबी हासिल की है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं ये जगहें
ये कूलिंग जोन आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। हरएक जोन में 100 कुर्सियां, बैठने की सुविधा, ठंडा पानी, 5 डेजर्ट कूलर और 5 हाई-स्पीड पंखे लगाए गए हैं, ताकि एक आरामदायक वातावरण मिले। इन केंद्रों पर ओआरएस पैकेट, टोपी, गमछा और प्राथमिक चिकित्सा किट भी दी जा रही है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता दी जा सके। ये केंद्र 24 घंटे संचालित हो रहे हैं और हरएक स्थान पर सहायता के लिए 10 सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की तैनाती शिफ्ट के आधार पर की गई है। 6 मई से ही सड़कों पर मोबाइल हीट रिलीफ यूनिट्स दौड़ रही हैं।
मोबाइल यूनिट्स से लाखों को मिली राहत
मोबाइल हीट रिलीफ यूनिट्स भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे लेबर चौक, शॉपिंग मॉल और बाजारों में घूम-घूम कर अब तक 3,33,505 लोगों की प्यास बुझा चुके हैं और उन्हें राहत दे चुके हैं। लोक निवास से मिले आंकड़ों के मुताबिक, प्रशासन ने अब तक करीब 1,35,269 लीटर पेयजल, 1,39,616 ओआरएस पैकेट, 55,176 गमछे और 52,141 टोपियां लोगों को बांटी हैं।
स्कूलों में वॉटर बेल और बेजुबानों के लिए जल पात्र
दिल्ली के स्कूलों में हाइड्रेशन मैंडेट नीति लागू की गई है, जिसके तहत स्कूलों में हर घंटे वॉटर बेल (पानी पीने की घंटी) बजाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह घंटी छात्रों को पानी पीने और ओआरएस पैकेट का सेवन करने के लिए प्रेरित करती है, ताकि डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की समस्या न हो। दिल्ली के 13 जिलों में सबसे कमजोर झुग्गी बस्तियों को चिन्हित किया गया है, जहां कूल रूफ पॉलिसी के तहत छतों को ठंडा रखने के उपाय किए जा रहे हैं। अंतरराज्यीय बस टर्मिनल कश्मीरी गेट पर कूल रूफ तैयार की है। बेजुबान पक्षियों और जानवरों की प्यास बुझाने के लिए जल पात्र रखे गए हैं।
सभी एजेंसियों को मिले सामूहिक निर्देश
डीडीए ने अपने 733 पार्कों को कूलिंग जोन के रूप में तैनात किया है। 98 पार्कों में प्राकृतिक जल निकायों का उपयोग गर्मी कम करने के लिए किया जा रहा है। साथ ही 100 नए वॉटर कूलर भी लगाए जा रहे हैं। एमसीडी और एनडीएमसी के पार्कों, प्रमुख चौराहों और कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त इलाकों में पक्षियों के लिए पानी के बर्तन और जानवरों के लिए छायादार आश्रय स्थल बनाए गए हैं। मेट्रो स्टेशनों, बाजारों और बस स्टैंडों पर 100 नए स्टेटिक हाइड्रेशन पॉइंट बनाने का निर्णय लिया गया है।