शहर में दौड़ती स्कूल बसें गाइड लाइन का पालन नहीं करती हैं। सरेआम नियमों की अनदेखी हो रही है। इसकी परवाह न स्कूल प्रबंधकों को है और न ही जिला प्रशासन को। बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों की अनदेखी कभी भी हादसे को दावत दे सकती है।
बता दें कि एटा में हुए बस हादसे में 25 बच्चों की मौत नियम की अनदेखी की वजह से हुई। बच्चे स्कूल से घर और घर से स्कूल सुरक्षित पहुंचें, इसके लिए मई 2014 में हरियाणा सरकार ने सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी जारी की थी।
इसके मुताबिक पहली शर्त है कि बसें पूरी तरह पीली रंग की हों, लेकिन आज तक यह अमलीजामा नहीं चढ़ा है। अब भी सभी स्कूलों की बसें पुराने ढर्रे पर चल रही हैं। कई स्कूल प्रबंधकों ने नीले, गुलाबी और कई और रंगों को मिलाकर बसों को रंगवा रखा है, जिससे बसों को पहचानना भी मुश्किल है कि ये स्कूल बसें है या पब्लिक ट्रांसपोर्ट।
स्कूलों में नया सत्र शुरू होने वाला है और स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया जारी है, इस वजह से कई बसों के पीछे स्कूल का विज्ञापन का बोर्ड लगा हुआ है, जिससे पीछे से निकलने वाला इमरजेंसी एग्जिट दरवाजा विज्ञापन की वजह से बंद हो गया है।
हादसे की सूरत में पीछे के दरवाजे से निकलना भी मुश्किल है। स्कूल बसों पर न तो रिफ्लेक्टर लगे हुए हैं और न ही सुरक्षा के कोई साधन दिखते हैं। किसी ने ब्रांडिंग के लिए पूरी बस पर स्कूल का नाम लिखवा रखा है।
ये हैं स्कूल बसों के लिए नए नियम
-बच्चों को स्कूल लाने वाली बस या अन्य वाहन पीले रंग में होने चाहिए।
-254 मिलीमीटर चौड़ी नीले रंग की पट्टी खिड़की से 178 मिलीमीटर नीचे हो।
-स्कूल वाहन पर सामने की तरफ सफेद रिफ्लेक्टिव टेप होनी चाहिए।
-बस के पीछे की तरफ लाल रंग का रिफ्लेक्टर गाड़ी के अनुसार होगा।
-पीले रंग की रिफ्लेक्टिव टेप जरूरी है, यह टेप 50 एमएम से कम चौड़ी नहीं होनी चाहिए।
-बस में आगे और पीछे स्कूल बस लिखा होना चाहिए।
बसों को लेकर आरटीए और पुलिस के साथ मिलकर अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए जल्द ही स्कूल प्रबंधकों की भी बैठक की जाएगी, ताकि गुरुग्राम में किसी तरह का हादसा न हो। -हरदीप सिंह, उपायुक्त