हरियाणा शिक्षा नियमावली 2003 की धारा 134 ए के विरोध में सोमवार को निजी स्कूल बंद रहेंगे। स्कूल कानून को खत्म कराने की मांग कर रहे हैं। इसमें हरियाणा बोर्ड के करीब 225 स्कूलों के अलावा सीबीएसई से संबंधित कुछ स्कूल भी शामिल है।
इनमें अधिकांश हरियाणा शिक्षण संगठन और हरियाणा बोर्ड के स्कूलों के संगठन से संबंधित है। स्कूलों ने विरोध के लिए छुट्टी की घोषणा पहले ही कर दी है। वहीं अभिभावक एकता मंच ने रविवार को एलान किया कि जो स्कूल सोमवार को बंद रहेंगे, उनके बाहर काले झंडे लगाकर विरोध किया जाएगा। वहीं, स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि 134ए नियम को लेकर सरकार केवल अपना पल्ला झाड़ रही है।
इसे लेकर न तो स्पष्ट नीति है और न ही नीयत। हरियाणा स्कूल शिक्षण संगठन के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल यादव का कहना है कि तत्कालीन हुड्डा सरकार के इस फैसले के खिलाफ 2013 में कोर्ट ने निर्णय दिया था कि इस कोटे के तहत जरूरतमंद छात्रों की पढ़ाई के लिए निजी स्कूल के खर्च की भरपाई सरकार करें, लेकिन तीन वर्षों के बाद भी स्कूलों को एक रुपया भी नहीं दिया गया है।
संगठन से जुड़े स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि उन्हें अब यह नियम कतई बर्दाश्त नहीं है। इसके बजाय शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) लागू कर दिया जाए। अगर सरकार 134ए के तहत समय पर भुगतान कर दें तो गरीब बच्चों को पढ़ाने व दाखिला देने में कोई दिक्कत नहीं है।
कम से कम सरकारी स्कूलों पर खर्च किए जाने वाले प्रति विद्यार्थी 2700 रुपये ही दे दिए जाएं, जिससे स्कूलों को थोड़ी राहत मिले। जिला प्रधान जेपी यादव का कहना है कि सरकार अपनी असंभव बातों को लेकर अड़ी हुई है, जिससे किसी भी पक्ष का फायदा होने वाला नहीं है। 9 मई के विरोध पर सरकार के रवैये का इंतजार है। अगर कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई तो 10 मई को आरपार की लड़ाई का एलान किया जाएगा।
अभिभावक एकता मंच के महासचिव रामफल श्योराण ने कहा कि अभिभावकों ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ विरोध जताते हुए काले झंडे लगाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि हर माह जमा करने वाली फीस में हड़ताल के दिनों की फीस काट कर जमा कराई जाए।