मीडिया के खिलाफ जारी किए गए दिल्ली सरकार के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रूख अखितयार करते हुए इस पर रोक लगा दी है।
बता दें कि दिल्ली सरकार ने हाल ही में निर्देश जारी करते हुए कहा था कि अगर सरकार के किसी भी कर्मचारी को ऐसा लगता है कि मीडिया में छपी किसी खबर से सरकार की छवि को धक्का पहुंचा है तो उसके खिलाफ तुरंत शिकायत करें।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक तरफ आप खुद यह कहते हैं कि आप ही पीड़ित हैं और दूसरी तरफ कार्यकाई करने की बात भी आप ही करें। यह दोनों बातें विरोधाभासी लगती हैं।
सरकार के इस सर्कुलर की अन्य राजनीति दलों ने भी काफी आलोचना की है। मंगलवार को बीजेपी सांसद रमेश बिधुड़ी ने दिल्ली सरकार के इस सर्कुलर के खिलाफ संसद में भी आवाज उठाई थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि हम लोकतंत्र में रहते हैं। मीडिया इसका चौथा स्तंभ है और उसका काम सरकार की आलोचना करना है ताकि सभी अपना काम अच्छे से करते रहें। जबकि कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को लोकतंत्र की जीत बताया है।
क्या है दिल्ली सरकार का सर्कुलर
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने निर्देश (सर्कुलर) जारी करते हुए अपने सभी अधिकारियों से कहा है कि उन्हें कोई भी ऐसी खबर दिखे जो सरकार या मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली है तो इसकी शिकायत प्रमुख सचिव (गृह) से करें ताकि मामले में कानूनी कार्यवाई की जा सके।
दिल्ली सरकार के सूचना और प्रसारण निदेशालय ने सूचना जारी करते हुए कहा है कि दिल्ली सरकार के किसी भी अधिकारी को अगर लगता है कि प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में चलाई गई किसी खबर से सरकार या उनकी छवि को कोई नुकसान हुआ है तो इसकी शिकायत प्रमुख सचिव से कर सकते हैं।
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक ऐसे किसी भी मामले में प्रमुख सचिव के पास एक रेफ्रेंस लेटर भेजा जाएगा जिसमें अवमानना से संबंधित तथ्य, प्रसारित किए जाने वाले माध्यम की जानकारी, तथ्यों में गलती, आरोपों की जानकारी के साथ यह बताया जाएगा कि क्यों और कैसे यह सरकार की छवि को प्रभावित करता है।
सरकार के मुताबिक इस शिकायत के आधार पर प्रमुख सचिव आरोपों की जांच करेंग और इस मामले में अन्य निदेशकों की भी राय लेने के बाद यह तय करेंगे कि क्या इस मामले में आईपीसी की धारा 499/500 का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
प्रमुख सचिव की जांच के बाद अवमानना का यह मामला कानून मंत्रालय को भेजा जाएगा। कानून मंत्रालय आरोप की जांच करेगा और बातएगा कि इसे आईपीसी की धारा 199(4) के तहत आगे बढ़ाना है या नहीं।
दोनों की विभागों की पुष्टि मिलने के बाद दिल्ली सरकार का गृह मंत्रालय मामले को सरकारी वकील के पास भेज देगा जो आईपीसी की धारा 199(2) के आधार पर मामले को अदालत में चुनौती देंगे।
इसलिए जारी किया ऐसा सर्कुलर...
बता दें कि हाल ही दिल्ली सरकार ने एक आदेश जारी करते हुए न्यूज चैनलों पर गंभीर निगरानी रखने की बात कही थी। इसके बाद ही यह नया आदेश जारी किया गया जिसमें मीडिया के खिलाफ कानूनी कदम उठाने के बारे में कहा गया है।
गौरतलब है कि हाल ही अरविंद केजरीवाल ने मीडिया के एक तबके पर आरोप लगाते हुए कहा था कि कुछ मीडिया संस्थानों ने आम आदमी पार्टी को खत्म करने की सुपारी ले रखी है।
मीडिया पर निगरानी रखने और सरकार के खिलाफ दिखाए जाने पर कानूनी कार्यवाई करने के दिल्ली सरकार के आदेश पर विरोधी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अरविंद केजरीवाल पर हमला किया है।
ऐसे होगी मीडिया के खिलाफ शिकायत
मीडिया के खिलाफ शिकायत करने के लिए पांच स्टेप्स को फॉलो करना होगा
1 किस (प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक) मीडिया ने किस तरह से की सरकार की अवमानना
2 प्रमुख सचिव (गृह) के पास जाएगा रेफ्रेंस लेटर
3 प्रमुख सचिव अन्य सचिवों से मशविरा कर तय करेंगे आरोप
4 प्रमुख सचिव की अनुमति के बाद कानून मंत्रालय करेगा आरोपों की जांच
5 सरकारी वकील के माध्यम से अदालत में की जाएगी शिकायत