आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए विधायक देवेंद्र सहरावत को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने अयोग्यता नोटिस को चुनौती देने वाली सहरावत की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सहरावत को पूरी प्रक्रिया से हो कर गुजरना होगा, कोर्ट इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। उन्हें दिल्ली विधानसभा में ही अपने खिलाफ जारी की गई नोटिस का जवाब देना होगा।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के ठीक पहले देवेंदर सहरावत ने आप छोड़ कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। इस पर विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से दल बदल विरोधी कानून के तहत उनके खिलाफ अयोग्यता नोटिस जारी कर दी गई थी।
इस नोटिस के खिलाफ सहरावत के वकील सोली सोराबजी ने बुधवार यानी 26 जून को जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बीआर गवाई की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की थी। इस पर पीठ ने उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट जाने के लिए कहा था। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट में भी इस पर सुनवाई हो सकती है।
लेकिन सोराबजी द्वारा लगातार आग्रह करने पर पीठ ने उन्हें याचिका दाखिल करने के लिए कहा। पीठ ने कहा था कि हम यह देखेंगे कि हमें इस पर विचार करना चाहिए या नहीं। इसके बाद सोराबजी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर की थी, जिसपर शुक्रवार को सुनवाई करने के लिए कोर्ट ने सहमती जताई थी।
बता दें कि दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने दलबदल विरोधी कानून के तहत सहरावत और एक अन्य विधायक अनिल वाजपेयी को भी अयोग्यता नोटिस जारी किया था। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले दोनों ‘आप’ विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे।