सुप्रीम कोर्ट ने जेल में अतीक अहमद द्वारा एक कारोबारी के अपहरण और देवरिया जेल में उसकी पिटाई के कथित मामले को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही शीर्ष अदालत ने अतीक को प्रयागराज की नैनी जेल से गुजरात की अति सुरक्षित जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया है।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने इस मामले की सीबीआई जांच का आदेश देते हुए अतीक को गुजरात भेजने का आदेश सुनाया। पीठ ने देवरिया जेल के पांच अधिकारियों को भी निलंबित करने का आदेश दिया है, जहां 26 दिसंबर, 2018 को लखनऊ के एक कारोबारी की पिटाई की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को अतीक के खिलाफ लंबित 106 मुकदमों की स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा है।
शीर्ष अदालत ने यह आदेश भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें दोषी ठहराए जाने वाले नेताओं पर आजीवन चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने की मांग की गई है। अमाइकस क्यूरी वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने कहा कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में कहा गया कि अहमद ने बिजनेसमैन का अपहरण करवाया था। वारदात के वक्त जेल के सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ की गई थी। जेल मैनुअल का पालन नहीं किया गया।
क्या है मामला
रियल इस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल ने गत 28 दिसंबर को एक एफआईआर दर्ज कराई थी। उसमें आरोप लगाया गया था कि लखनऊ से अपहरण कर मोहित को देवरिया जेल लाया गया, जहां अतीक और उसके गुंडों ने उनकी पिटाई की। उन्हें अपनी पांच कंपनियां भी अतीक व उसके बेटे के नाम करने को मजबूर किया गया। छोड़ने से पहले अतीक ने उनकी कार और अन्य वस्तुएं भी ले लीं। इन फर्मों की संयुक्त संपत्ति करीब 45 करोड़ रुपये है। अतीक 11 फरवरी, 2017 से जेल में बंद है।
106 मामले दर्ज हैं
पांच बार के विधायक और एक बार सांसद अतीक पर 1979 से 2019 के बीच 106 मामले दर्ज हैं। इनमें 17 हत्या, 12 गैंगस्टर एक्ट, आठ आर्म्स एक्ट और चार गुंडा एक्ट के केस दर्ज हैं। अतीक समाजवादी पार्टी और अपना दल (सोनेवाल गुट) से भी जुड़ा रहा है।