सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के माता-पिता की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने नाबालिग आरोपी का केस रेगुलर अदालत में चलाए जाने की मांग की थी।
यही नहीं कोर्ट ने भाजपा नेता समेत उन याचिकाओं को भी खारिज कर दिया, जिनमें जघन्य अपराधों के आरोपी किशोरों के मुकदमे किशोरों की स्पेशल कोर्ट में चलाने की बजाए रेगुलर कोर्ट में चलाने की मांग की गई थी और किशोर शब्द की नए सिरे से व्याख्या किए जाने की मांग की गई थी।
Live Update: 28 मार्च के दिन भर की घटनाएं
चीफ जस्टिस पी सदाशिवम, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस शिव कीर्ति सिंह की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने ये याचिकायें खारिज कर दीं।
शुक्रवार खारिज की गई याचिकाओं में 16 दिसंबर के गैंगरेप मामले में दोषी किशोर के मामले की नए सिरे से सुनवाई के लिये रेगुलर कोर्ट में किए जाने की निर्भया के पिता की याचिका भी शामिल थी। कोर्ट ने कहा कि किशोर का मुकदमा नियमित सुनवाई के लिये फिर से भेजने का सवाल ही नहीं उठता।
पढ़ें: 'बीजेपी और कांग्रेस का विदेशी फंड अवैध'
हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार ने इन दोनों याचिकाओं का विरोध किया था। पीड़ित के पिता ने याचिका में कहा था कि 31 अगस्त, 2013 का किशोर न्याय बोर्ड का फैसला परिवार को स्वीकार्य नहीं है। इसीलिए वह इस कानून को चुनौती दे रहे हैं क्योंकि राहत के लिये संपर्क करने हेतु कोई अन्य प्राधिकार उपलब्ध नहीं है।