सुप्रीम कोर्ट ने ने शुक्रवार को दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण की परियोजना पर काम शुरू करने की अनुमति दे दी। चौथे चरण की परियोजना 103.94 किलोमीटर की लंबाई में मेट्रो के विस्तार की है, जिसपर निर्माण शुरू करने के लिए न्यायालय ने आदेश दिया। न्यायालय ने परियोजना को लेकर संबंधित प्राधिकारियों को भी जरूरी निर्देश दिए। यह प्रोजेक्ट पांच साल में पूरा होगा।
इससे पहले दिल्ली सरकार की ओर से जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ को बताया गया कि राज्य सरकार चौथे चरण को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। कोर्ट पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण अथॉरिटी (इपीसीए) की उस रिपोर्ट पर विचार कर रही थी, जिसमें चौथे चरण का काम 2014 से अटके होने की जानकारी दी गई है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रोजेक्ट से संबंधित वित्तीय पहलुओं को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार में सहमति नहीं बन पा रही है। यह भी कहा गया है कि चौथे फेज के पूरा हाने पर रोजाना 18.6 लाख यात्री जुड़ेंगे। 10 अप्रैल को दिल्ली सरकार ने डीएमआरसी से कहा था कि जब तक इन मसलों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक चौथे चरण का काम शुरू नहीं होना चाहिए।
पिछली सुनवाई में दिखाया था सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा था कि यह प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण है। जिसका जल्द से जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए। फेज-चार मेट्रो प्रोजेक्ट और अधिक इंतजार नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी कहा था कि वह इस पर आदेश पारित करेगा।
चौथे चरण में छह कॉरिडोर
दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण में छह कॉरिडोर पर काम होना है। इनमें एयरोसिटी-तुगलकाबाद, इंदरलोक-इंद्रप्रस्थ, लाजपत नगर- साकेत जी ब्लॉक, मुकुंदपुर-मौजपुर, जनकपुरी वेस्ट-आरके आश्रम और रिठाला से बवाना और नरेला शामिल हैं।