कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों को अब अन्य लोगों का भी समर्थन मिलने लगा है। स्कूली बच्चे हो या मेडिकल और अन्य पेशो की पढ़ाई कर रहे छात्र। दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचकर अन्नदाताओं के साथ इस आंदोलन में अपना योगदान दे रहे हैं। रक्तदान कर कई जिंदगियां बचाने वाले रामनिवास लोहान भी सोमवार को किसानों के समर्थन में टिकरी बॉर्डर पहुंचे। उन्होंने सरकार से किसी कानून को वापस लेने की मांग की। रामनिवास ने देश के सभी नागरिकों से इस आंदोलन में किसानों का समर्थन करने की भी अपील की।
हरियाणा के हिसार जिले के रहने वाले 48 वर्षीय रामनिवास लोहान 18 साल की उम्र से रक्तदान कर रहे हैं। बीते 30 सालों में वह 113 बार रक्तदान कर लोगों की जिंदगियां बचा चुके हैं। रामनिवास बताते हैं कि उनकी स्पोट्र्स की दुकान है। कई दिनों से वह किसानों के इस संघर्ष को देख रहे हैं। उन्होंने सोचा कि अन्नदाता की इस लड़ाई में उन्हें भी शामिल होना चाहिए। सोमवार को वह अपनी दुकान बंद करके बाजार के अन्य 30 दुकानदारों के साथ टिकरी बॉर्डर पहुंच गए।
जहां उन्होंने केंद्र सरकार से नए कानूनों को वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में ऐसे प्रावधान है कि किसानों को भूखे पेट भरने को मजबूर होना पड़ेगा। उनके साथ-साथ आम लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में हक कीऊ लड़ाई में सभी लोगों को तभी किसानों का साथ देना चाहिए।
एक हादसे ने रक्तदान के लिए किया था प्रेरित
रामनिवास ने बताया कि जब वह 18 साल के थे। तब दिल्ली में हुए एक सड़क हादसे में वह घायल हो गए थे। उनके साथ चार और लोग भी घायल हुए थे। अस्पताल में भर्ती हुए तो उनके साथ के बेड पर भर्ती एक मरीज को खून की जरूरत थी। उस समय काफी प्रयास के बाद भी कुछ व्यक्ति को रक्त नहीं मिला और उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद उन्होंने प्रण लिया कि वह अपने जीवन में अधिक से अधिक रक्तदान कर लोगों की जिंदगियां बचाएंगे।उन्होंने बताया कि वह साल में 4 बार रक्तदान करते हैं। कई बार इस कार्य के लिए अपने राज्य से बाहर भी जाते हैं।