ईएमयू ट्रेन 64055 के चालक यशपाल अपनी जान देकर हजारों लोगों की जान बचा गए। 12171 लोकमान्य मुंबई-हरिद्वार एक्सप्रेस को अचानक आगे देखने के बाद यशपाल ने अपनी ट्रेन के इमरजेंसी ब्रेक लगाए, जिससे ईएमयू का चालक यार्ड पूरी तरह से पिचक गया और वह उसमें बुरी तरह फंस गए।
ग्रामीणों, स्कूली छात्रों व यात्रियों ने मशक्कत कर उन्हें बाहर निकाला। उधर हादसे की सूचना मिलते ही गाजियाबाद के न्यू विजयनगर में रहने वाला उनका परिवार पलवल रवाना हो गया।
जब प्रशासन, पुलिस और रेलवे के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे तो उन्हें घायल अवस्था में एनएच-2 स्थित प्रीमिया अस्पताल पहुंचाया गया। वहां से सिविल अस्पताल लाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
51 वर्षीय यशपाल खुर्जा के समीप के गांव शहबाजपुर के रहने वाले थे। उनकी ड्यूटी गाजियाबाद हेडक्वार्टर में थी। सोमवार दोपहर वे अपनी पत्नी लता व 23 वर्षीय पुत्र गौरव से मिलकर ड्यूटी पर निकले थे।
पत्नी लता के अनुसार बाद दोबारा उनकी पति यशपाल से बात नहीं हुई। मंगलवार सुबह उन्हें हादसे की सूचना मिली।
ट्रेनों के टकराने की आवाज सुन दौड़े
घटनास्थल पर मौजूद गांव बघौला के विनोद शर्मा ने चालक यशपाल को सेल्यूट करते हुए कहा कि उनकी सूझबूझ से हजारों यात्रियों की जान बची।
घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर स्थित दीप मेमोरियल स्कूल के संचालक व कुलदीप कौशिक के अनुसार ट्रेनों के टकराने की आवाज उनके स्कूल तक पहुंची, जिस पर वे स्कूल के कई छात्रों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
छात्रों, ग्रामीणों व यात्रियों की मदद से जीआरपी के जवानों ने करीब घंटे भर की मशक्कत के बाद यशपाल को बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वे तब तक होश में थे व उन्हें यात्रियों की कुशलता की चिंता थी।
पैतृक गांव में ही होगा अंतिम संस्कार
जीआरपी ने रेलवे एक्ट की धारा 175 सहित भादंसं की धारा 336 337 व 304ए के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की। रेलवे के अधिकारियों ने घटना की सूचना मृतक के परिजनों को दी।
पत्नी लता व पुत्र गौरव के पहुंचने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराकर उन्हें सौंप दिया गया। मृतक यशपाल का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव शहबाजपुर में किया जाएगा।
तीन घंटे तक ट्रेन से नीचे नहीं उतरीं महिला यात्री
मंगलवार को हुए ट्रेन हादसे के दौरान ट्रेन में सफर कर रहीं महिला यात्रियों में भय बना हुआ था। महिलाओं का कहना था कि ट्रेन काफी धीमी गति से चल रही थी।
इससे बड़ा हादसा होने से टल गया। लगभग तीन घंटे तक महिलाएं सहमी बैठीं रहीं और नीचे नहीं उतरी। ट्रेन चलने के बाद ही उन्हें सुकून मिला।
जब यह हादसा हुआ तो मैं अपने घर पर फोन पर बात कर रही थी और जब ट्रेन टकराई तो मैं डिब्बे के बाहर थी। एक साथ झटका लगा और मैं गिर गई, जिससे मुझे हाथ में मामूली सी चोट आई है। इस हादसे को मैं भूला नहीं पाऊंगी।- हंसा जोशी, यात्री एक्सप्रेस ट्रेन
मैं अपने पति के साथ भोपाल से मेरठ जा रही थी, हम बैठे हुए थे तो अचानक थे धक्का लगा और हम भयभीत हो गए। जब मेरे पति ने बताया कि एक ट्रेन ने पीछे से टक्कर मारी है तो मैं पूरी तरह से सहम गई।- दीपाली जैन, यात्री एक्सप्रेस ट्रेन
हम सोए हुए थे लेकिन जब एक साथ ट्रेन टकराई तो अचानक तेज आवाज आई, जिससे हम बुरी तरह से घबरा गए। जब 10 मिनट बाद बाहर की तरफ देखा तो बहुत बुरा मंजर था। हम हादसे के बाद से ट्रेन से बाहर नहीं निकले।- -दिव्या जायसवाल, यात्री एक्सप्रेस ट्रेन