स्वास्थ्य सचिव ने आज तक निर्देश नहीं माना
भारद्वाज ने कहा कि जिस दिन से दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री का पद संभाला है, तब से लेकर अब तक लगभग 40 से 50 बैठक स्वास्थ्य सचिव, डीएचएस एवं अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ कर चुका हूं। सभी बैठकों में लिए गए फैसलों के तहत हर बार स्वास्थ्य सचिव को यूओ नोट्स भेजे गए, फैसलों के मिनट्स भेजे गए और स्वास्थ्य सचिव को उन बैठक में लिए गए फैसलों को क्रियान्वित करने के निर्देश भी दिए गए। कई बार अलग से पत्र व्यवहार किया गया कि जो आदेश दिए गए थे, उस पर अब तक क्या कार्रवाई की गई, इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष प्रस्तुत करें, लेकिन न तो स्वास्थ्य सचिव की ओर से अब तक किसी भी संबंध में कोई कार्रवाई की गई और न ही मेरे किसी भी पत्र द्वारा मांगी गई रिपोर्ट का जवाब स्वास्थ्य सचिव एसबी दीपक कुमार की ओर से आज तक मिला है। 9 मार्च को स्वास्थ्य मंत्री बनने के तुरंत बाद 21 मार्च को एक बैठक कर यह आदेश जारी किया था कि जो भी दवाइयां और अन्य उपभोग्य वस्तुएं दिल्ली सरकार के अस्पतालों में खरीदी गई हैं शीघ्र उनका ऑडिट किया जाए, लेकिन दीपक कुमार ने आज तक निर्देश नहीं मानाद्ध
केंद्र सरकार को बताया जिम्मेदार
भारद्वाज ने कहा कि दो महीने पहले मुख्यमंत्री के जरिये उपराज्यपाल को शिकायत की गई थी कि स्वास्थ्य सचिव और तत्कालीन डीएचएस नूतन मुंडेजा को बर्खास्त कर विभागीय कार्रवाई की जाए, लेकिन इन अधिकारियों के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया। जो घटनाएं सामने आ रही हैं, इन सब के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। कोई भी अधिकारी दिल्ली की चुनी हुई सरकार के प्रति या सरकार में चुने गए जनता के प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह नहीं है। केंद्र सरकार का यह कहना कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में भ्रष्टाचार हो रहा है और मंत्री मिलकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं, यह बड़ा ही हास्यास्पद है। औचक निरीक्षण में स्वास्थ्य सचिव मौजूद नहीं रहते हैं।