दिल्ली के एलएनजेेपी अस्पताल में चार लोगों पर प्लाज्मा थेरेपी का प्रयोग कर चुकी दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि आईसीएमआर और केंद्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्लाज्मा थेरेपी एक तकनीकी चिकित्सा है। केवल उन लोगों को इसका प्रयोग करना चाहिए जिनके पास केंद्र से अनुमति है, बिना अनुमति के इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। दिल्ली सरकार को केंद्र सरकार से इसकी अनुमति मिल चुकी है।
रेड जोन में दोबारा होगी लोगों की स्क्रीनिंग
वहीं जैन ने कहा कि 'रेड जोन' में रहने वाले लोगों की दोबारा से स्क्रीनिंग कराई जाएगी। मेडिकल टीमें घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कोरोना वायरस के कुल 3515 केस हैं जिसमें कल के 76 केस शामिल हैं। 1094 लोग ठीक हो चुके हैं। 53 लोग आईसीयू में हैं और पांच लोग वेंटिलेटर पर हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने दिया था बयान
दरअसल स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने 28 अप्रैल को बताया था कि, प्लाज्मा थेरेपी को अब तक भरोसेमंद नहीं माना जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी के प्रभाव को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन शुरू किया है।
जब तक इसका निष्कर्ष नहीं निकलता और मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता, इस थेरेपी का इस्तेमाल सिर्फ शोध और ट्रायल के लिए होना चाहिए। अगर प्लाज्मा थेरेपी को उचित दिशानिर्देशों के तहत उपयुक्त तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जाता तो जान को खतरा हो सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि प्लाज्मा थेरेपी अभी प्रायोगिक चरण में है और इससे कोरोना का इलाज हो सकता है इसका कोई सबूत नहीं है। इसे लेकर अब दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री का यह बयान आया है।