गोलचा के निजी स्टाफ से जुड़ी शिकायत उपराज्यपाल तक पहुंची थी
सतीश गोलचा को अचानक हटाए जाने को लेकर पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि हाल में भ्रष्टाचार के मामलों में हुई कार्रवाई और वरिष्ठ अधिकारियों पर उठे सवालों के बाद यह फैसला लिया गया। सूत्रों के अनुसार, गोलचा के निजी स्टाफ से जुड़ी शिकायत उपराज्यपाल तक पहुंची थी, जिसके बाद उन्हें तलब भी किया गया था। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
24 घंटे में आईबी से दिल्ली पुलिस की कमान तक
16 जुलाई को करीब 20 वर्ष बाद अनुराग कुमार की यूटी कैडर में वापसी हुई। अगले ही दिन उन्हें दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त कर दिया गया। महज दो घंटे में उन्होंने सतीश गोलचा से कार्यभार भी संभाल लिया। इससे पहले वे दिल्ली के उत्तरी जिले में डीसीपी रह चुके हैं। आईबी में सेवा देते हुए आंतरिक सुरक्षा से जुड़े दायित्व निभाए।
वरिष्ठता से ऊपर भरोसे को मिली प्राथमिकता
जानकारी के अनुसार, वरिष्ठता क्रम में अनुराग कुमार से पहले 1992 बैच की गरिमा भटनागर और राजेश खुराना तथा 1993 बैच के रॉबिन हिबू का नाम आता है। तीनों वर्तमान में विशेष पुलिस आयुक्त हैं। इसके बावजूद सरकार ने अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस की कमान सौंपी। अब इन वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दिए जाने की संभावना है।
अनुराग को एलजी का भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अनुराग कुमार की नियुक्ति के बाद अब उनके किसी केंद्रीय एजेंसी के निदेशक बनने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं। उन्हें उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू का भरोसेमंद अधिकारी भी माना जाता है। दोनों ने वाशिंगटन में साथ काम किया था, जिससे उनके बीच बेहतर कार्यसमन्वय की चर्चा लंबे समय से होती रही है। आईबी में करीब दो दशक तक सेवाएं देने वाले अनुराग कुमार की पहचान ईमानदार और सख्त अधिकारी के रूप में रही है। उन्होंने खुफिया तंत्र, आंतरिक सुरक्षा, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और उत्तर-पूर्व से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व संभाले हैं।