नोएडा। सरदार वल्लभभाई पटेल की निर्माणाधीन मूर्ति (स्टेच्यू ऑफ यूनिटी) में सहयोग देने के लिए नोएडा निवासी मूर्तिकार राम वी. सुतार चीन गए हैं।
वहां उन्होंने निर्माणाधीन मूर्ति का मुआयना किया और फिनिशिंग में मदद की। उनके साथ पुत्र अनिल सुतार भी गए हैं। चीन से फोन पर अमर उजाला को अनिल सुतार ने बताया कि यहां उनको फिनिशिंग में आने वाली तकनीकी खामियों को दूर करने लिए बुलाया गया है।
उन्होंने चीन की कंपनी को सलाह और निर्देश देते हुए मूर्ति बनाने में मदद की। सबसे पहले मूर्ति का पैर बनाया जा रहा है। इसमें कई जोड़ होंगे।
दरअसल, गुजरात के साधु बेत में स्थापित होने वाली 522 फीट (करीब 182 मीटर) ऊंची सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति चीन में बन रही है।
इस तरह लाया जाएगा भारत
2989 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट का ठेका लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) कंपनी को दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी।
सरदार पटेल की कांसे की प्रतिमा चीन के एक कारखाने टीक्यू आर्ट फाउंड्री में बनवाई जा रही है। यह चीन के नैनचांग में स्थित जियांग्जी टोक्वाइन कंपनी का हिस्सा है। मूर्ति पहले थर्मोकोल से बनाई जाएगी।
इसके बाद उसे कांसे में ढाला जाएगा। हालांकि मूर्ति के बड़े-बड़े पीस को चीन से भारत लाने में मुश्किल होगी। बताया जा रहा है कि इसके तीन-तीन फीट के छोटे-छोटे पीस बनाए जा रहे हैं। भारत लाने के बाद मूर्ति को जोड़कर उसका रूप दिया जाएगा।
भारत में बनी थी 30 फीट की डमी
राम वी. सुतार ने सबसे पहले थर्मोकोल से सरदार पटेल की 30 फीट की डमी बनाई। इसे लार्सन एंड टूब्रो ने बनाने को कहा था।
इसके बाद चीन की कंपनी ने भारत आकर सुतार से मूर्ति की 3डी इमेज हासिल की। इसके बाद चीन में मूर्ति बनाने का काम शुरू हुआ। 2014 लोकसभा चुनाव से पहले सरदार पटेल की मूर्ति बनाने के लिए घर-घर से मिट्टी व लोहा जुटाया गया था।
उस समय बताया गया था कि इसका उपयोग सरदार पटेल की मूर्ति बनाने में होगा, लेकिन बाद में पता चला कि दरअसल यह प्रतिमा कांसे की होगी।