'ये लोग केवल व्यक्तिगत ध्यान आकर्षित करने के लिए समाज को परेशान करते हैं'
रावत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति कट्टर हुए बिना भी गहरा आध्यात्मिक हो सकता है। उन्होंने एक्स पर एक विस्तृत बयान जारी किया। इसमें उन्होंने उन लोगों को निशाना बनाया जो फतवे जारी कर रहे थे और सारा की व्यक्तिगत आस्था पर सवाल उठा रहे थे। रावत ने समाज में धार्मिक अतिवाद के बढ़ते खतरे के प्रति आगाह भी किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरवादी दोनों तरफ मौजूद हैं। ये लोग केवल व्यक्तिगत ध्यान आकर्षित करने के लिए समाज को परेशान करते हैं।
हरीश रावत का बचाव
हरीश रावत ने अपने बयान में कहा कि सारा अली खान नवाब पटौदी और शर्मिला टैगोर की पोती हैं। वह सैफ अली खान की बेटी हैं और उनकी अपनी आस्था है। वह अपने पिता से मिले धर्म का भी पालन करती हैं। उन्होंने रूढ़िवादी आलोचकों पर निशाना साधा और पूछा कि ऐसी असहिष्णुता देश को कहां ले जाएगी। रावत ने कहा कि भक्ति और कट्टरता में अंतर है। उन्होंने जोर दिया कि यदि किसी की किसी देवता में आस्था है, तो उसे रोकना नहीं चाहिए।
मौलाना का फतवा
इससे पहले, बरेली के मौलाना मुफ्ती शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक फतवा जारी किया। वह ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने सारा अली खान के मंदिर दौरे, पूजा और अनुष्ठानों को इस्लामी कानून (शरिया) के तहत अस्वीकार्य (नाजायज) और हराम बताया। मौलाना ने अभिनेत्री से शरिया सिद्धांतों का उल्लंघन करने के लिए अल्लाह से माफी (तौबा) मांगने का आग्रह किया। उन्होंने एएनआई को बताया कि किसी भी मुस्लिम पुरुष या महिला के लिए दूसरे धर्म की आस्था में भाग लेना, प्रार्थना करना और धार्मिक अनुष्ठान करना शरिया के तहत अस्वीकार्य है।