एम्स के पूर्व सीवीओ और वर्तमान में बतौर डिप्टी सेक्रेटरी एम्स में कार्यरत संजीव चतुर्वेदी को एक बार फिर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) से राहत मिली है। संजीव की अर्जी को स्वीकार करते हुए कैट ने स्वास्थ्य मंत्रालय की उस पहल पर रोक लगा दी जिसमें मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि वित्त वर्ष-2014-15 का एसीआर फिर से लिखी जाएगी। कैट ने एक अप्रैल 2014 से 15 जुलाई 2014 तक के एसीआर दोबारा से लिखने अथवा रिव्यू करने से रोक लगा दी है। इसमें अगली सुनवाई 30 जून को होगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 28 मई को संजीव को एक पत्र लिखा गया था और एसीआर का पूरा परफॉर्मा भेजा गया था, जिसमें कहा गया था कि वित्त वर्ष-2014-15 का एसीआर दोबारा से लिखा जाएगा अथवा रिव्यू किया जाएगा। 16 जुलाई 2014 से 16 दिसंबर 2014 तक का संजीव का एसीआर तत्कालीन एम्स के डीडीए और वर्तमान एम्स निदेशक डॉ. एम सी मिश्रा ने लिख दी थी। इसके बाद उस दौरान केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहे डॉ. हर्षवर्धन को एसीआर लिखनी थी, लेकिन अभी तक एम्स से उस फाइल को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री तक भेजी ही नहीं गई।
संजीव चतुर्वेदी की ओर से कैट में दाखिल याचिका में कहा गया कि जानबूझकर उनकी एसीआर लिखने में देरी की जा रही है और रोक कर रखा गया। जबकि कोई भी सक्षम अधिकारी किसी अधिकारी की एसीआर की फाइल को एक माह से ज्यादा समय तक नियमानुसार अपने पास नहीं रख सकता। नियमानुसार अपने मातहत कार्य करने वाले अधिकारी का एसीआर तभी लिखा जा सकता है जब वह अधिकारी कम से कम 90 दिनों तक उसकी देखरेख में कार्य कर चुका हो।