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कांग्रेस से नाराज हुए शीला दीक्षित के बेटे संदीप, ब्लॉग लिखकर निकाली भड़ास

Tue, 26 Jul 2016 03:34 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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संदीप दीक्ष‌ित
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अगले साल होने वाले यूपी के विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस शीला दीक्षित को सीएम कैंडिडेट बनाकर बड़ा दांव चल रही हैं वहीं उनके बेटे और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित पार्टी में अपने को अलग-थलग पा रहे हैं।
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संदीप अपने इस दुख को एक ब्लॉग लिखकर व्यक्त किया है और कांग्रेस को लेकर अपनी भड़ास निकाली है। उन्होंने अपने इस ब्लॉग में खासतौर से दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन को निशाना बनाया है।

संदीप दीक्षित ने अपने ब्लॉग ‌में लिखा है कि उनके सामने फिलहाल तीन रास्ते हैं, कांग्रेस जिसपर वह यकीन करते हैं, बीजेपी और आप। उन्होंने आगे लिखा है कि, ‘कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के बारे में मुझे बताया गया है कि बागी स्वभाव की वजह से मुझे पसंद नहीं किया जाता?'
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हालांकि उन्होंने अपने ब्लॉग में यह संकेत दिया है कि वो कांग्रेस के अलावा अन्य विकल्प ढूंढ रहे हैं लेकिन एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में वो बोले कि वह कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे।
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अजय माकन से जताई नाराजगी

सोनिया गांधी के साथ शीला दीक्षित - फोटो : PTI
संदीप ने अपने ब्लॉग में अजय माकन से विशेषरूप से नाराजगी जताई है। उन्होंने लिखा है, ‘जहां तक दिल्ली यूनिट की बात है तो मैं ऐसे नेतृत्व को स्वीकर नहीं कर सकता जिसका पूरा जोर शीला दीक्षित के नेतृत्व में चलाई गई सरकार को खारिज करने में लगा हो।'

दीक्षित ने लिखा है कि कांग्रेस की दिल्ली इकाई को एक ऐसा शख्स का लीड कर रहा है जो सीधे-सीधे लगातार शीला दीक्षित पर निशाना साध रहा है। संदीप ने अजय माकन पर कैग के कॉमवेल्थ रिपोर्ट के गलत तथ्यों को मीडिया तक पहुंचाने का भी आरोप लगाया।

संदीप दीक्षित ने ब्लॉग में उनके सामने मौजूद दो विकप्लों की भी चर्चा की है। साथ ही उन्होंने लिखा है कि, आप नेताओं की नैतिक और आर्थिक ईमानदारी बिखर चुकी है। आप नेतृत्व भी सत्ता की भूखी और जोड़-तोड़ में बिल्कुल दूसरी पार्टियों की तरह ही लग रही है।

दीक्षित का दावा है कि इन सबके ऊपर आप गुड गर्वनेंस देने में पूरी तरह नाकाम रही है। बीजेपी के बारे में उन्होंने लिखा है उनके विचार बीजेपी और संघ से पूरी तरह से अलग हैं।

विकल्प के बारे में वह लिखते हैं, 'अब मैं ऐसे मवेशी की तरह घास की तलाश करूंगा जहां मुझे सम्मान मिले, मेरा आत्म सम्मान बरकरार रहे।'
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