दमघोंटू हवा और बढ़ते प्रदूषण के बीच दक्षिणी दिल्ली रहने वाले दंपति का कमाल
काजल कुमारी
नई दिल्ली। राजधानी की दमघोंटू हवा और बढ़ते प्रदूषण के बीच दक्षिणी दिल्ली का सैनिक फार्म इलाका इन दिनों चर्चा में है। कारण, एक अनोखा घर जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) दिनभर में अक्सर 10 से 15 तक ही दर्ज किया जाता है। यहां स्वच्छ हवा 15,000 से अधिक पौधों मिलती है। दंपती पीटर सिंह और नीनो कौर ने घर व रूफटॉप पर कई साल की मेहनत से इसे विकसित किया है।
दंपती की कहानी सिर्फ पौधों तक सीमित नहीं है बल्कि जीवन-मृत्यु के संघर्ष से निकली सतत जीवनशैली की मिसाल है। नीनो को वर्ष 1998 में क्रॉनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया का पता चला था। 2009 में लंदन में बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद बीमारी तो ठीक हो गई लेकिन दिल्ली लौटने के बाद उनकी सांसें प्रदूषण में घुटने लगीं। इस घटना ने दोनों को क्लीन एयर की दिशा में प्रयोग शुरू करने को प्रेरित किया। पीटर दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से गणित में पीएचडी हैं। उन्होंने बताया कि घर में एक विशेष कूल पैनल सिस्टम लगाया है, जहां पानी के बहाव से आने वाली हवा फिल्टर होती है। फिर यह हवा ग्रीनहाउस में पहुंचती है, जहां हजारों पौधे उसे शुद्ध ऑक्सीजन में बदल देते हैं। एक्वापोनिक्स मछली टैंक के पानी से पौधों की खेती का उपयोग कर फल, सब्जियां, जड़ी बूटियां और हर्ब्स उगाई जाती हैं। इतना ही नहीं, घर से कूड़ा निकलता ही नहीं। नीनो बताती हैं कि हम हर तरह के किचन और गार्डन वेस्ट को कम्पोस्ट कर लेते हैं। पहली बार इसे देखकर कॉलोनी का सफाई कर्मचारी भी हैरान रह गया था। अब वह सूखे पत्ते जलाने की जगह उन्हें कम्पोस्टिंग के लिए इनके घर पर लाता है।
अपना कचरा खुद संभालिए
समाज को वापस देने की सोच रखते हुए दंपती ने कॉलोनी में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनाए हैं जिससे भूजल स्तर में सुधार हुआ है। साथ ही, वे दूसरों को सस्टेनेबल लिविंग सिखाने के लिए दो-सप्ताह का ऑनलाइन कोर्स भी चलाते हैं। पीटर का संदेश है कि सरकार पर मत टालिए, अपना कचरा खुद संभालिए। पेड़ लगाइए, हवा को साफ कीजिए। बदलाव हमसे ही शुरू होगा।