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साहित्य अकादमी पुरस्कार: हिंदी में पार्वती तिर्की और सुशील शुक्ल सम्मानित, डोगरी युवा पुरस्कार की घोषणा बाकी

Wed, 18 Jun 2025 10:25 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

साहित्य अकादमी ने 23 युवा और 24 बाल साहित्यकारों को 2025 के पुरस्कारों के लिए चुना, जिसमें हिंदी में पार्वती तिर्की और सुशील शुक्ल को सम्मानित किया जाएगा। विजेताओं को ताम्रफलक और 50,000 रुपये का पुरस्कार मिलेगा।
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साहित्य अकादेमी ने युवा और बाल साहित्य पुरस्कार 2025 घोषित किया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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साहित्य अकादमी ने बुधवार को युवा और बाल साहित्य पुरस्कार 2025 की घोषणा की। हिंदी में पार्वती तिर्की को युवा और सुशील शुक्ल को इस साल का बाल साहित्य पुरस्कार दिया जाएगा। बुधवार को अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक की अगुवाई में हुई बैठक में 23 युवा लेखकों और 24 बाल साहित्यकारों की किताबों को पुरस्कार के लिए चुना गया। ये चयन तीन सदस्यों वाले निर्णायक मंडल ने सटीक प्रक्रिया के तहत किया। डोगरी भाषा का युवा पुरस्कार बाद में घोषित होगा। इन दोनों पुरस्कारों के तहत विजेताओं को उत्कीर्ण ताम्रफलक और 50,000 रुपये की राशि दी जाएगी, जो एक विशेष समारोह में प्रदान की जाएगी।

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हिंदी में युवा पुरस्कार पार्वती तिर्की को उनकी कविता-संग्रह फिर उगना के लिए मिला है। वहीं, बाल साहित्य पुरस्कार सुशील शुक्ल की किताब एक बटे बारह को दिया गया। अंग्रेजी में अद्वैत कोट्टरी के उपन्यास सिद्धार्थ-द बॉय हू बिकेम द बुद्ध को युवा पुरस्कार और नितिन कुशलप्पा की दक्षिण-साउथ इंडियन मिथ्स एंड फैब्लस रीटोल्ड को बाल साहित्य पुरस्कार मिला है। पंजाबी में मनदीप औलख की कविताएं गर्ल्स हॉस्टल और पाली खादिम की जादू पत्ता को चुना गया है। उर्दू में नेहा रुबाब की मजहरुल हक-तारीक-ए-आजादी-ए-हिंद और जजनफर इकबाल की कौमी सितारे को सम्मान मिला है।

अन्य भाषाओं में इन रचनाकारों ने बाजी मारी
असमिया में सुप्रकाश भुइयां की कूंचियानामा और सुरेंद्र मोहन दास की मैनाहंतर पद्य, बांग्ला में सुदेशना मोइत्रा की एकरोखा चिरुनी तोलाशी और त्रिदिब कुमार चट्टोपाध्याय की ऐखोनो गाये कांटा देय, बोडो में अमर खुंगुर बर की आं असुर और बिनय कुमार ब्रह्म की खान्थि बोसोन, गुजराती में मयूर खावडू की नरसिंह टेकरी और कीर्तिदा ब्रह्मभट्ट की टिंचक ने बाजी मारी। इसी तरह कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओड़िआ, राजस्थानी, संस्कृत, संताली, सिंधी, तमिल और तेलुगु में भी कई रचनाकारों को सम्मान मिला है।

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