महिलाओं के सुरक्षा को ध्यान में रखकर जामिया और जागो री संस्था ने सेफ्टीपिन एप्स इजाद किया है। इससे एनसीआर के इलाकों के सुरक्षित या असुरक्षित होने की जानकारी मिल जाएगी।
छात्रों की टीमों ने सर्वे के बाद एनसीआर के 4566 ऐसे स्थानों को चिह्नित किए है, जिन्हें सुरक्षिति या असुरक्षित कहा जा सके। मुश्किल वक्त में एप्स का बटन दबाते ही पांच रजिस्टर्ड लोगों तक मदद का संदेश पहुंच जाएगा।
स्मार्ट फोन मुश्किल वक्त में आपके लिए मददगार भी हो सकते हैं। इसके लिए आपको अपने फोन पर सेफ्टीपिन एप्स डाउनलोड कर रजिस्ट्रेशन करना होगा।
इसके तहत किसी भी स्थान पर जाने से पहले एप्स पर लोकेशन को सर्च कर जान लें कि इलाका सेफ है या नहीं। अगर मुश्किल आती है तो एक क्लिक और कीजिए। उसके फौरन बाद आपके पास रजिस्टर्ड पांच मोबाइल नंबर पर ट्रबुल का संदेश पहुंच जाएगा।
महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जामिया मिल्लया इस्लामिया के नेहरू वूमन स्टडी सेंटर और ‘जागो री’ संस्था ने मिलकर सेफ्टीपिन एप्स ईजाद की है।
दिल्ली-एनसीआर में छात्रों ने महीनों सर्वे के बाद सुरक्षित, कम सुरक्षित और खतरनाक इलाके तलाशे हैं। एप्स संयोजक कल्पना विश्वनाथन के अनुसार, एप्स को तैयार करने के बाद छात्रों की दर्जनों टीमों ने दिल्ली-एनसीआर में 4566 इलाके चिह्नित किए हैं।
इनमें असुरक्षित को लाल, कम सुरक्षित को नारंगी तो सुरक्षित को हरे रंग से दर्शाया है। सेफ्टीपिन मैप पर आधारित एक एप्लीकेशन है, जोकि एनसीआर समेत देशभर के शहरों को जोड़ रहा है।
एप्स संयोजक देशभर के शहरों के लोगों के साथ स्थानीय पुलिस को भी जोड़ रहे हैं, ताकि मुश्किल में अपनों संग पुलिस भी मदद के लिए पहुंच सके।
एप्स के जरिए आप दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा के साथ ही गाजियाबाद के सुरक्षित व असुरक्षित इलाकों को सर्च कर सकते हैं। एप्स ने देहरादून, चंडीगढ़, हरिद्वार के अलावा विदेशों तक पहुंच बना ली है।