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दिल्ली में पार्कों का सुरक्षा ऑडिट: कई खामियां, डार्क स्पॉट्स' खड़े करते हैं ढेर सारे सवाल; दिन ढलते ही खतरा

Fri, 25 Sep 2026 03:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली भर के पार्कों का सुरक्षा ऑडिट किया है। इसमें कई ग्रीन स्पेस में निगरानी, लाइटिंग और बाउंड्री वॉल में कमियां पाई गई हैं, जबकि इन पार्कों में हर दिन सैकड़ों लोग आते हैं।
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सुरक्षा ऑडिट 11 पैमानों पर किया गया है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आस्था कुंज पार्क में सामूहिक दुष्कर्म के बाद राष्ट्रीय राजधानी में पार्कों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसे में दिल्ली पुलिस ने दिल्ली भर के पार्कों का सुरक्षा ऑडिट किया है। इसमें कई ग्रीन स्पेस में निगरानी, लाइटिंग और बाउंड्री वॉल में कमियां पाई गई हैं, जबकि इन पार्कों में हर दिन सैकड़ों लोग आते हैं। यह ऑडिट दक्षिण-पूर्व दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में तीन लोगों द्वारा एक 17 साल की लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद किया गया है।

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अमर उजाला के पास मौजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सुरक्षा ऑडिट 11 पैमानों पर किया गया है। इनमें नाम, क्षेत्रफल, रखरखाव करने वाली एजेंसी, यहां किस तरह के अपराध हुए हैं, खुलने-बंद होने का समय, लोगों का जमावड़ा, गेट की संख्या, गार्ड, लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे, अंधेरी जगहें (डार्क स्पॉट), पुलिस गश्त और बाउंड्री वॉल की हालात आदि पाॅइंटों के आधार पर किया गया है।

कुल पार्कों की ऑडिट से पता लगा है कि सुरक्षा व्यवस्था पार्क के आकार और लोकेशन के हिसाब से अलग-अलग है। रोहिणी के सेक्टर 10 में 170 एकड़ में फैले स्वर्ण जयंती पार्क (जिसका रखरखाव डीडीए करती है) के बारे में पुलिस ने नोट किया कि यहां से गाड़ी चोरी और झपटमारी के मामले सामने आए हैं। पार्क में चार गेट हैं और चौबीसों घंटे गार्ड तैनात रहते हैं। हालांकि यहां कुल 27 गार्ड हैं। हालांकि, ऑडिट में पाया गया कि लाइटिंग तो है, लेकिन वह काफी नहीं है। सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं, लेकिन उन्हें नाकाफी बताया गया है। ऑडिट के मुताबिक, पार्क में अंधेरी जगहें (डार्क स्पॉट) भी हैं।
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डीडीए के ही एक और पार्क रोहिणी के अवंतिका सेक्टर 1 में डिस्ट्रिक्ट पार्क के बारे में पुलिस ने नोट किया कि यहां आर्म्स एक्ट, गैंबलिंग एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और मारपीट के मामले सामने आए हैं। 100 एकड़ के इस पार्क में पांच गेट, गार्ड और लाइटिंग सिस्टम है। हालांकि, यहां कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं है। ऑडिट में एक अंधेरी जगह (डार्क स्पॉट) की पहचान की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बाउंड्री वॉल टूटी हुई पाई गई।

छोटे पार्कों की स्थिति
छोटे पार्कों के नतीजों से भी निगरानी में कमियों का पता चलता है। आईपी एस्टेट में 16 एकड़ में फैले दीन दयाल उपाध्याय पार्क (जिसका रखरखाव सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट करता है) में गेट, गार्ड और लाइटिंग तो है, लेकिन सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। इस पार्क में रोजाना लगभग 150-250 लोग आते हैं और इसका इस्तेमाल दो समय पर होता है। इस पार्क सुबह 6 से 10 बजे तक और शाम 4 से 7 बजे तक खुलता है।
रोशनआरा बाग

उत्तरी दिल्ली के रूप नगर में 50 एकड़ में फैले रोशनआरा बाग की देखरेख दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) करती है और यहां रोजाना लगभग 500-700 लोग आते हैं। ऑडिट में सात गेट, 12 गार्ड, लाइटिंग और 21 सीसीटीवी कैमरे पाए गए। कोई भी डार्क स्पॉट (अंधेरी जगह) नहीं मिला और बाउंड्री वॉल और सड़कें अच्छी हालत में पाई गईं। ऑडिट करने वाले अधिकारियों में से एक ने कहा कि इस पार्क की अच्छी तरह से देखभाल की जाती है क्योंकि स्थानीय लोग किसी भी कमी या समस्या के सामने आते ही उसकी जानकारी दे देते हैं।

पूर्वी दिल्ली
पूर्वी दिल्ली के मंडावली में एमसीडी की देखरेख वाले अमृत पार्क में, जो लगभग 9,00,000 वर्ग मीटर में फैला है, रोज़ाना 150-200 लोग आते हैं। पार्क में दो गेट और चार गार्ड हैं। यहां लाइटिंग तो अच्छी पाई गई, लेकिन कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं है।

किसी पार्क में अंधेरा, कहीं साल से बंद कमरा, कहीं नशे का जमावड़ा
आस्था कुंज पार्क में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद भी दिल्ली के कई पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव नहीं दिख रहा है। ईस्ट ऑफ कैलाश, एंड्रयूज गंज, आरके पुरम, गोविंदपुरी, सादिक नगर और द्वारका के पार्कों में कई कमियां सामने आईं। कहीं शाम होते ही अंधेरा छा जाता है, कहीं साल से कमरे बंद हैं तो कहीं नशा करने वालों के जमावड़े की शिकायत है। एंड्रयूज गंज और आरके पुरम के लोगों के अनुसार, शाम के बाद पार्कों के कई हिस्सों में रोशनी कम हो जाती है। 

आरके पुरम निवासी शिवानी ने बताया कि अंधेरा होने के बाद बच्चों को पार्क भेजने में डर लगता है। द्वारका के सेक्टर-5, 6, 7 और 10 और सादिक नगर के कुछ पार्कों में शाम के समय नशा करने वालों के बैठने की शिकायत स्थानीय लोगों ने की है। ऑल द्वारका रेजिडेंट्स फेडरेशन की उपाध्यक्ष कविता चौधरी ने बताया कि पार्कों में बच्चों और महिलाओं की आवाजाही रहती है, इसलिए नियमित पुलिस गश्त जरूरी है। वहीं, ईस्ट ऑफ कैलाश के डी ब्लॉक पार्क में लंबे समय से बंद कमरा भी लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। आरडब्ल्यूए सदस्य केशव ने बताया कि कमरे को हटाने की मांग के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
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