मतलब ग्रमीण दिल्ली के मतदाताओं के लिए खेती और रोजगार के मुद्दे अब भी प्रदूषण से अधिक प्रसंगिक हैं। हालांकि इस मामले में शहरी मतदाता ग्रामीण से ज्यादा सजग नजर आए। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार जब शहरी मतदाताओं से पूछा गया कि वे किस आधार पर अपनी सरकार का चयन करते हैं, तो 45 प्रतिशत मतदाताओं ने जलवायु प्रदूषण को चुनाव का अहम मुद्दा बताया।
इन मुद्दों के आधार पर वोट देते हैं दिल्ली के शहरी मतदाता:
| मतदाताओं की प्राथमिकताएं |
संख्या |
| यातायात संबंधित समस्याएं |
50% |
| जलवायु प्रदूषण |
45% |
| बेहतर रोजगार अवसर |
43% |
हालांकि शहरी वोटरों के लिए यातायात संबंधित समस्याएं सबसे ज्यादा परेशानी वाला मुद्दा है। रिपोर्ट के मुताबिक 50 फीसदी शहरी आबादी यातायात समस्याओं के लिए लिए जाने वाले फैसलों के आधार पर सरकार चुनती है। वहीं 43 प्रतिशत मतदाता बेहतर रोजगार देने वाली सरकार का चुनाव करते हैं।
हालांकि शहरी हों या ग्रामीण, किसी भी क्षेत्र के मतदाता अपनी सरकार के कामों से संतुष्ट नहीं हैं। चाहे जलवायु प्रदूषण का मामला हो या खेती-बाड़ी से जुड़ा कोई फैसला, दिल्ली के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों के लोग अपनी सरकार को उनके काम के लिए औसत से कम अंक देते हैं।
एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार जलवायु प्रदूषण की समस्याओं के लिए सरकार द्वारा लिए गए फैसलों के लिए शहरी मतदाता सरकार को पांच में से 2.29 अंक देते हैं। वहीं जब ग्रामीण और शहरी सभी मतदाताओं से एक साथ उनका मत पूछा गया तो उन्होंने इस मुद्दे पर काम करने के लिए सरकार को पांच में से 2.29 अंक दिए, जो औसत से कहीं नीचे है।
एडीआर की रिपोर्ट और वायु गुणवत्ता सूचकांक को एक साथ रख कर देखें तो मालूम पड़ेगा कि दिल्ली में जलवायु प्रदूषण जिस गति से बढ़ रहा है, उससे बचने के लिए आम लोगों और सरकार, दोनों को और अधिक गंभीर व सख्त हो कर काम करने की जरूरत है।