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खुलासा: दिल्ली के लोगों को ही नहीं है प्रदूषण की चिंता, जबकि खतरे में है जान

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दिल्ली वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
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लगातार बढ़ते जलवायु प्रदूषण के कारण राजधानी दिल्ली गैस चेंबर बन गई है। श्वांस संबंधी समस्याओं को लेकर अस्पतालों में जाने वाले मरीजों को चिकित्सक कुछ समय के लिए दिल्ली एनसीआर से दूर जाने की सलाह दे रहे हैं। नॉन-स्मोकिंग फैमली से आने वाली युवती दिल्ली की हवा में मौजूद जहरीले तत्वों के कारण महज 28 वर्ष की उम्र में कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी का शिकार हो जाती है। यमुना के तट पर उगने वाली फसलें मानव शरीर के लिए जहर का काम कर रही हैं, लेकिन दिल्ली की ग्रामीण जनता को दूर-दूर तक इस बात की कोई चिंता नहीं है। 

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फिलहाल बारिश के कारण प्रदूषण में थोड़ी राहत जरूर है, लेकिन इसके बावजूद राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के हिसाब से दिल्ली की हवा सामान्य से ज्यादा प्रदूषित है। सूचकांक के हिसाब से चार सितंबर को दिल्ली की वायु गुणवत्ता 193 दर्ज की गई, जो सामान्य से कहीं ज्यादा प्रदूषित है।

प्रदूषण के इस स्तर पर सामान्य रूप से भले ही बहुत दिक्कत न हो, लेकिन अस्थमा के साथ-साथ फेफड़े या हृदय के रोगियों को परेशानी होने लगती है। मालूम हो की हवा में 0-50 तक के प्रदूषण स्तर को सामान्य की श्रेणी में माना जाता है। ऐसे में 193 वाकई चिंताजनक है।
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वहीं हैरान करने वाली बात यह है कि दिल्ली के ग्रामीण इलाकों के लोगों को जल वायु प्रदूषण की इस जानलेवा स्तर की कोई चिंता नहीं है। ग्रामीण दिल्ली की जनता जब अपने लिए सरकार चुनती है तो चुनाव के पैमाने में उनकी पहली तीन प्रथमिकताओं में जलवायु प्रदूषण का मुद्दा कहीं नहीं रहता।


इन मुद्दों के आधार पर वोट देते हैं दिल्ली के ग्रामीण मतदाता:
मतदाताओं की प्राथमिकताएं संख्या
कृषि उत्पादों के लिए उच्च मूल्य वसूली 56%
बेहतर रोजगार अवसर 52%
खेती के लिए बिजली की उप्लब्धता 44%


एडीआर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ग्रमीण दिल्ली के 56 प्रतिशत मतदाता कृषि उत्पादों के लिए उच्च मूल्य वसूली के मुद्दे को अपनी पहली प्राथमिकता मानते हैं। इसके बाद 52 प्रतिशत मतदाताओं को रोजगार के बेहतर अवसर चाहिए, जबकि 44 फीसदी मतदाताओं के लिए खेती के लिए बिजली की उप्लब्धता ज्यादा जरूरी है।



 
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क्या कहते हैं शहरी मतदाता

मतलब ग्रमीण दिल्ली के मतदाताओं के लिए खेती और रोजगार के मुद्दे अब भी प्रदूषण से अधिक प्रसंगिक हैं। हालांकि इस मामले में शहरी मतदाता ग्रामीण से ज्यादा सजग नजर आए। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार जब शहरी मतदाताओं से पूछा गया कि वे किस आधार पर अपनी सरकार का चयन करते हैं, तो 45 प्रतिशत मतदाताओं ने जलवायु प्रदूषण को चुनाव का अहम मुद्दा बताया। 

इन मुद्दों के आधार पर वोट देते हैं दिल्ली के शहरी मतदाता:
मतदाताओं की प्राथमिकताएं संख्या
यातायात संबंधित समस्याएं 50%
जलवायु प्रदूषण 45%
बेहतर रोजगार अवसर 43%

हालांकि शहरी वोटरों के लिए यातायात संबंधित समस्याएं सबसे ज्यादा परेशानी वाला मुद्दा है। रिपोर्ट के मुताबिक 50 फीसदी शहरी आबादी यातायात समस्याओं के लिए लिए जाने वाले फैसलों के आधार पर सरकार चुनती है। वहीं 43 प्रतिशत मतदाता बेहतर रोजगार देने वाली सरकार का चुनाव करते हैं।

हालांकि शहरी हों या ग्रामीण, किसी भी क्षेत्र के मतदाता अपनी सरकार के कामों से संतुष्ट नहीं हैं। चाहे जलवायु प्रदूषण का मामला हो या खेती-बाड़ी से जुड़ा कोई फैसला, दिल्ली के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों के लोग अपनी सरकार को उनके काम के लिए औसत से कम अंक देते हैं। 

एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार जलवायु प्रदूषण की समस्याओं के लिए सरकार द्वारा लिए गए फैसलों के लिए शहरी मतदाता सरकार को पांच में से 2.29 अंक देते हैं। वहीं जब ग्रामीण और शहरी सभी मतदाताओं से एक साथ उनका मत पूछा गया तो उन्होंने इस मुद्दे पर काम करने के लिए सरकार को पांच में से 2.29 अंक दिए, जो औसत से कहीं नीचे है। 

एडीआर की रिपोर्ट और वायु गुणवत्ता सूचकांक को एक साथ रख कर देखें तो मालूम पड़ेगा कि दिल्ली में जलवायु प्रदूषण जिस गति से बढ़ रहा है, उससे बचने के लिए आम लोगों और सरकार, दोनों को और अधिक गंभीर व सख्त हो कर काम करने की जरूरत है।
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