एनएमसी का ड्राफ्ट जारी, अधूरे आवेदन सीधे होंगे खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों की बढ़ोतरी, नए मेडिकल कॉलेजों और नए पाठ्यक्रमों की मंजूरी के नियमों को और सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा है। आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, जिन मेडिकल कॉलेजों के अस्पताल, शैक्षणिक भवन या अन्य आवश्यक ढांचे निर्माणाधीन हैं, उन्हें सीटें बढ़ाने या नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं मिलेगी।
प्रस्ताव के मुताबिक, आवेदन से पहले संस्थान के पास अस्पताल, शैक्षणिक भवन, बुनियादी सुविधाएं और सभी आवश्यक कानूनी मंजूरियां पूरी तरह उपलब्ध होनी चाहिए। अस्थायी भवनों या निर्माणाधीन परियोजनाओं के आधार पर किए गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। ड्राफ्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि आवेदन अधूरा पाया जाता है या मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) की ओर से निर्धारित जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए जाते हैं, तो आवेदन सीधे खारिज किया जा सकता है। मेडिकल कॉलेजों को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबद्धता (एफिलिएशन) की वैध सहमति और आवेदन की अंतिम तिथि से 90 दिन पहले जारी सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट भी जमा करना होगा। इसके अलावा, कॉलेजों के लिए अनिवार्य कॉर्पस फंड बनाने का प्रस्ताव है, जिसकी राशि एमएआरबी तय करेगा।
30 दिन में मांगे सुझाव और आपत्तियां
एनएमसी ने यह भी प्रस्तावित किया है कि यदि कोई संस्थान एमएआरबी या आयोग को प्रभावित करने का प्रयास करता है, तो उसके नए कॉलेज, नए पाठ्यक्रम या एमबीबीएस सीटों में वृद्धि से जुड़े आवेदन निलंबित या अस्वीकृत किए जा सकते हैं। आयोग ने ड्राफ्ट नियमों पर संबंधित पक्षों और आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इनके आधार पर अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे।