परिवहन विभाग में वाहनों के रजिस्ट्रेशन में जमकर धांधली हुई। दो दशक पुराने वाहनों के पंजीकरण की जांच हुई तो कई पते ऐसे मिले, जो वास्तव में हैं ही नहीं।
किसी पते पर हिंडन नदी है तो किसी पर शहर का प्रमुख चौराहा। वेरिफिकेशन करने गए कर्मचारी अब अफसरों से पूछ रहे हैं कि साहब! हम राजेंद्र सिंह निवासी हिंडन को कहां तलाशें।
आरटीओ ने इनका परीक्षण शुरू कराया तो घपला सामने आया है। आरटीओ ने वाहन स्वामियों के नाम पते के सत्यापन के आदेश दिए हुए हैं। इनमें से ज्यादातर पुराने व्यवसायिक वाहनों के मालिक हैं।
पिछले दो दशक में वाहनों के पंजीकरण में मानकों का पालन नहीं किया गया। वाहनों को जरूरी एड्रेस प्रूफ लिए बिना ही पंजीकृत कर दिया गया। कई मामलों में फर्जी एड्रेस प्रूफ भी लगाए गए।
ऐसे वाहन मालिकों का अब कहीं पता नहीं चल रहा है। बिना फिटनेस दौड़ रहे वाहनों की तलाश में और बकाया टैक्स जमा कराने के लिए इनकी तलाश की जा रही है।
बता दें कि इससे पहले भी आधे अधूरे पते पर वाहन रजिस्ट्रेशन का मामला सामने आ चुका है। डीएम और कमिश्नर भी ऐसे वाहन मालिकों की तलाश के आदेश जारी कर चुके हैं।