मच्छरों का डंक तमाम सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा है। साल दर साल मच्छरों के काटने से लाखों लोग बीमार हो रहे हैं। आरटीआई के दस्तावेजों के मुताबिक पिछले पांच साल में 58 लाख 72 हजार 879 लोगों को डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया में से कोई न कोई बीमारी हो चुकी है। वहीं उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड जैसे आधा दर्जन प्रदेशों में चिकुनगुनिया का वर्ष 2015 में एक भी केस दर्ज न होना हैरत में डालता है।
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सितंबर 2016 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में फाइल की गई आरटीआई का जवाब मंत्रालय ने 24अक्टूबर 2016 को दिया। अमर उजाला को प्राप्त आरटीआई दस्तावेजों के माध्यम से मंत्रालय के केन्द्रीय स्वास्थ्य आसूचना ब्यूरो अनुभाग ने 2011 से लेकर 2015 तक चिकुनगुनिया, मलेरिया, डेंगू और स्वाइन फ्लू की बीमारी से ग्रसित केसों के बारे में जानकारी दी।
इनमें से चिकुनगुनिया, मलेरिया और डेंगू बीमारी अलग-अलग प्रजाति के मच्छरों काटने से पैदा होती है। इन पांच सालों में पूरे देश में मलेरिया से 54 लाख 49 हजार 419, मलेरिया से दो लाख 85 हजार 310 और चिकुनगुनिया से 98 हजार 493 लोग बीमार हुए। इसके अलावा पिछले पांच सालों में 36 प्रदेशों और केन्द्र शासित प्रदेशों में डेंगू से 961 मलेरिया से 2562 लोगों की मौत दर्ज की गई और चिकुनगुनिया से मौत का एक भी केस दर्ज नहीं है।
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आरटीआई दस्तावेजों से हैरत में डालने वाली जानकारी भी पता चली है
डेंगू, मच्छर
- फोटो : file photo
उधर, आरटीआई दस्तावेजों से हैरत में डालने वाली जानकारी भी पता चली है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, पंजाब, दमन व दीव और लक्षदीप में चिकनगुनिया के एक भी केस दर्ज नहीं किया किया। जबकि हरियाणा और चंडीगढ़ में इस बीमारी का सिर्फ एक-एक केस दर्ज है।
इसके अलावा हरियाणा, हिमाचल, जम्मू व कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, दिल्ली समेत 20 प्रदेशों में वर्ष 2015 में मलेरिया से एक भी मौत दर्ज न होने की बात चौंकाती है। जबकि बाकी के 16 प्रदेशों में मलेरिया से 287 लोगों की मौत दर्ज की गई।
वहीं डेंगू के आंकड़े भी हतप्रभ करते हैं। 2015में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, चंडीगढ़ समेत 28 प्रदेश ऐसे हैं जहां नौ या इससे कम डेंगू से मरने वालों की संख्या दर्ज की गई। जबकि अन्य प्रदेशों में डेंगू से मरने वालों की संख्या 2015 में 220 दर्ज हुई। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मच्छरों पैदा होने वाली सरकारी व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़ा करता है। इसलिए कई बार राज्य स्तर पर इन आंकड़ों को प्रभावित करने की आशंका होती है।
आरटीआई से एच1एन1 स्वाइन फ्लू बीमारी के बारे में भी जानकारी दी गई। वर्ष 2010 की अपेक्षा 2015 में स्वाइन फ्लू के मामले दोगुने से भी ज्यादा हो गए। 2010 में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या 20 हजार 604 थी तो 2015 में इसकी संख्या बढ़कर 42 हजार 592 हो गई। पिछले पांच सालों में स्वाइन फ्लू 6हजार 151 लोगों की मौत हो चुकी है। ठंड के मौसम में स्वाइन फ्लू वायरस ज्यादा सक्त्रिस्ए होता है।