दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
नागरिकों के पास अब एनएसई से सूचना मांगने का कानूनी अधिकार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण है। इस निर्णय के बाद एनएसई पर आरटीआई कानून लागू होगा और नागरिकों को उससे सूचना मांगने का कानूनी अधिकार मिलेगा।
न्यायमूर्ति सी हरिशंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने वर्ष 2010 में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना द्वारा दिए गए फैसले को बरकरार रखते हुए एनएसई की अपील खारिज कर दी। 2010 के फैसले में कहा गया था कि यद्यपि एनएसई का पंजीकरण कंपनियों अधिनियम के तहत एक निजी कंपनी के रूप में हुआ था, लेकिन प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 के तहत स्टॉक एक्सचेंज के रूप में मान्यता मिलने के बाद वह सार्वजनिक कार्य करने वाला प्राधिकरण बन गया।
खंडपीठ ने माना कि केंद्र सरकार और बाद में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की ओर से प्रदान की गई मान्यता के कारण एनएसई आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एच) के तहत स्व-शासन की संस्था की श्रेणी में आता है।
एनएसई की निजी संस्था के रूप में पंजीकृत होने की दलील खारिज
एनएसई ने अदालत में दलील दी थी कि वह कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत पंजीकृत निजी संस्था है, इसलिए उसे सरकारी या सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक दायित्व निभाने और वैधानिक मान्यता प्राप्त होने के कारण एनएसई आरटीआई कानून के दायरे में आएगा।